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तथ्य बिना सत्य नहीं

उपासना स्थल अधिनियम क्या है ? मोदी के हिंदुत्व को उनके चेले ने दी चुनौती !

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उपासना स्थल अधिनियम क्या

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उपासना स्थल अधिनियम क्या है ? मोदी के हिंदुत्व को चेले ने दी चुनौती !

उपासना स्थल अधिनियम क्या है ? क्यों भाजपा के एक नेता ने नरेंद्र मोदी सरकार को चुनौती सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है ? प्लेसेज ऑफ वारशिप एक्ट 1991 के खिलाफ दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायलय ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा है. इसका जवाब प्रधानमंत्री मोदी और भारत की तक़दीर बदल देगा. ये फैसला अब नरेंद्र मोदी को करना है की भावी पीढ़ी उनको किस तरह से याद करे. उपासना स्थल कानून को लेकर हिन्दू समाज के मन में आक्रोश क्यों है ? क्यों और कैसे यह कानून नरेंद्र मोदी के हिंदुत्व की असली परीक्षा है ? इन सारे सवाल का जवाब खुद नरेंद्र मोदी है.

उपासना स्थल अधिनियम क्या
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावी पीढ़ी द्वारा अपने शासनकाल को किस तरह याद किया जाना पसंद करेंगे. इसका जवाब केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब तय करेगा. सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट याचिका दायर की है. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार से राय मांगी है. ये कानून हिंदुओं को उनके धार्मिक स्थलों पर हुए कब्जे पर दावे से रोकता है। जब तक यह कानून रहेगा तब तक मथुरा और काशी जैसे मंदिरों पर हुए कब्जों की दावेदारी प्रबल नहीं होगी । इस कानून से सिर्फ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को बहार गया था क्यूंकि तब ये मामला न्यायालय में विचाराधीन था. हिन्दू संगठनों के मुताबिक काशी, मथुरा समेत देश की हजारों मंदिरों की जमीनों पर आज भी कब्जा है।

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अयोध्या पर फैसले के बाद से ही काशी मथुरा विवाद पर चर्चा शुरू हो गई थी. हालाँकि अभी तक संघ के किसी बड़े अधिकारी या बीजेपी के बड़े नेताओं का इस पर कोई बयान सामने नहीं आया है. लेकिन मोदी सरकार के रिकॉर्ड को देखते हुए अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है. पिछले 6 सालो में देश की राजनीती में हिन्दू वोटर काफी अहम् हो गया है. सबसे बड़े सेक्युलर का दावा करने वाली पार्टिया भी मंदिर मंदिर घूम रही है. बंगाल में ममता बनर्जी चंडी पाठ कर रही है तो अरविन्द केजरीवाल हनुमान चालीसा के बाद रामराज्य की बात करने लगे है. राहुल प्रियंका का मंदिर दर्शन या अखिलेश यादव के का कृष्णा की मूर्ति लगवाना. हिंदुत्व के इस होड़ में नरेंद्र मोदी कहाँ खड़े है इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट में दिए जवाब तय करेंगे.

narendra modi prayer hindu modi
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प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट क्या है ?

इस एक्ट को खत्म करने के लिए सुसुप्रीम कोर्ट में एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए एक याचिका दायर की है। याचिका में कहा, “उक्त प्रा‌वधान संविधान के अनुच्छेद–14, 15, 21, 25, 26 व 29 का उल्लंघन करता है। संविधान के समानता का अधिकार, जीवन का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट 1991 दखल देता है। केंद्र सरकार ने अपने जूरिडिक्शन से बाहर जाकर ये कानून बनाया था। पूजा पाठ और धार्मिक विषय राज्य का सब्जेक्ट है और केंद्र सरकार ने इस मामले में मनमाना कानून बनाया है।” आरोप है की प्लेसेज ऑफ वारशिप एक्ट 1991 एक्ट मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस सरकार लाइ थी. 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार ने Places of Worship act 1991 को पास किया था, जिसके तहत 1947 की स्थिति के अनुसार कोई भी किसी धार्मिक स्थल को लेकर कोई दावा नहीं कर सकता है।

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