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किसान आंदोलन बड़ा खुलासा : 26 जनवरी को दिल्ली बनेगा अमेरिका, मारे जाएंगे 1000 लोग ?

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किसान आंदोलन बड़ा खुलासा

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किसान आंदोलन बड़ा खुलासा : 26 जनवरी को दिल्ली बनेगा अमेरिका, मारे जाएंगे 1000 लोग ?

26 जनवरी और किसान आंदोलन पर बड़ा खुलासा हुआ है. आशंका जताई जा रही है आंदोलन की आड़ में
कुछ ऐसा करने का प्लान है जिससे भारत सरकार अंतराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम हो जाए. इस अंदेशे को समझने को लिए 06 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद पर भीड़ के हमले को समझना होगा. एक चुने हुए राष्ट्रपति को रोकने के लिए कुछ सौ प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी संसद में घुसकर खूब हिंसा की. 5 लोगों की जान चली गई, ये प्रदर्शनकारी ट्रम्प के समर्थक थे. उन्हें अपने देश की चुनाव आयोग, कोर्ट, सरकार संविधान किसी पर भरोषा नहीं था. भारत में पिछले 2 सालों में ऐसे कई प्रदर्शन हो चुके है. CAA के खिलाफ तो दिल्ली में 50 लोगों की मौत हो गई थी. 26 जनवरी को ऐसा क्या हो सकता है जिसने ख़ुफ़िया एजेंसियों की नींद हराम कर दी है.

किसान आंदोलन बड़ा खुलासा
किसान आंदोलन बड़ा खुलासा

किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट से रोक लगने और कमिटी गठन के बाद किसान नेताओं और कांग्रेस पार्टी ने आंदोलन ख़त्म करने से मना कर दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद एक टीवी चैनल के डिबेट में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा की जब तक तीनो कानून रद्द नहीं होगा आंदोलन ख़त्म नहीं होगा. उन्होंने दावा किया की अगर सरकार ने जबरदस्ती आंदोलन ख़त्म किया तो कम से कम 1000 लोग मारे जाएंगे. ऐसा दावा उन्होंने सरकार को मिल रही इनपुट के आधार पर किया. सरकार की कब किसने कहाँ ऐसा इनपुट दिया इसका जवाब वो नहीं दे पाए. टिकैत के दावे में कितना दम है ये भविष्य की बात है, लेकिन ऐसी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. ऐसे कई उदाहरण इस आंदोलन के दौरान सामने आये है जिनकी कड़ियों को जोड़ कर देखने पर आशंका और गहरी हो जाती है.

किसान आंदोलन पर बड़ा खुलासा : फंडिंग और मकसद दोनों भारत के लिए खतरनाक ?

भीड़तंत्र अब दुनिया भर के लोकतंत्रों के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। भारत जैसे आबादी वाले देश के लिए और चिंताजनक है.बढ़ती बेरोजगारी युवाओं को बरगलाने का सबसे उम्दा हथियार बन गया है. डर, लालच या बरगलाकर कुछ हज़ार लोगों को सड़क पर उतार देना कोई बड़ी बात नहीं है. नागरिकता कानून के प्रदर्शन और नतीजें पूरी दुनिया देख चुकी है. किसान आंदोलन के पीछे भी वही ताकते खड़ी है जो CAA के खिलाफ थी. दिल्ली हिंसा के लिए खास दिन (अमेरिकी राष्ट्रपति दिल्ली में थे) का चयन किया गया, जिससे हिंसा को अंतराष्ट्रीय खबर बनाया जा सके. चुनाव हर चुकी पार्टियां, और सरकार से नाराज़ एनजीओ और बुद्धिजीवी किसान आंदोलन को खूब हवा दे रहे है. इनका मकसद हिंसा के सहारे सरकार को काम करने से रोकना है. इस बार ये लोग कुछ भोले भले किसानो को बरगलाकर उनका कन्धा इस्तेमाल कर रहे है. आरोप है की कांग्रेस आंदोलन फायदा उठाकर हरियाणा में खट्टर सरकार गिरना चाहती है. कांग्रेस कार्यकर्त्ता लोगों को भड़काकर दुष्यंत चौटाला समेत बीजेपी विधायकों का विरोध करवा रहे है.

Caroot from twiiter
Caroot from twiiter

इस देश का संविधान सरकार को चुनती है, दोनों सदनों से पारित बिल को वापस नहीं लिया जा सकता. अगर जनता को सरकार का काम काज अच्छा नहीं लगता तो चुनाव में वह सरकार बदल सकती है. किसान नेता जो मांग कर रहे है उन्हें पता है की ये संभव नहीं फिर वो मानने को तैयार क्यों नहीं ? तर्क और मुद्दा हर बार अलग होता है पर तरीका एक ही है। देश की सरकार, मीडिया, कोर्ट समेत तमाम संवैधानिक संथाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोगों को भड़काने का नया प्रयोग पिछले कुछ सालों में खूब हुआ है. 26 जनवरी के परेड के समय ट्रेक्टर रैली निकालकर वो क्या सन्देश देना चाहते है. गणतंत्र दिवस की परेड भारत के सैन्य बल, तकनीकी क्षमता, विकास, गतिशीलता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव का नमूना होती है। किसान आंदोलन के नाम पर जब बॉलीवुड की बड़ी अभिनेत्री जान्हवी कपूर को समर्थन देने के लिए मजबूर किया जा सकता है तो, पंजाब के आम किसानों में किस तरह भय का माहौल होगा ये समझा जा सकता है.
tractor march karnal
tractor march karnal

किसान आंदोलन के हिंसक होने का डर सुप्रीम कोर्ट जता चूका है. लोगों के आशंका का मुख्य कारन है आंदोलन का मॉडल. दरअसल ये आंदोलन किसानो के लिए कम मोदी का विरोध करने के लिए ज्यादा हो रहा है. ये बाद तो राहुल गाँधी को 72000 रूपये का चुनावी घोषणा की सलाह देने वाले अर्थशाष्त्री मान चुके है. अगर इस आंदोलन को सिर्फ राजनीतिक दलों का समर्थन होता तो हिंसा की आशंका कम होती, लेकिन राजनैतिक के अलावे जो चेहरे इसमें शामिल है वो डर पैदा कर रहे है. अरुंधति रॉय मंच पर खड़ी होकर आंदोलनकारियों को समझा रही है की ‘सरकार उनके वही कर रही है जो बस्तर की लड़ाई लड़ने वालो (नक्सलियों) के साथ कर रही है,. दिल्ली में दंगा भड़काने को लेकर पुलिस ने आंदोलन के नेता योगेंद्र यादव का नाम अपनी चार्जशीट में डाला है. अरुंधति रॉय और योगेंद्र यादव का इतिहास रहा है की वो लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काते रहते है. ऐसे में 26 जनवरी को किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता.

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