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तथ्य बिना सत्य नहीं

चम्पावत की आदमखोर बाघिन के नाम दर्ज है शिकार करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड !

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चम्पावत की आदमखोर बाघिन

चम्पावत की आदमखोर बाघिन

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चम्पावत की आदमखोर बाघिन के नाम दर्ज है शिकार करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड !

आदमखोर बाघ या तेंदुएं के बारे सुना होगा, लेकिन चम्पावत की आदमखोर बाघिन के बारे में बहुत कम लोग जानते है. उत्तराखंड स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का नाम भी इसी बाघिन की वजह से रखा गया था. इतिहास की सबसे खतरनाक बाघिन का रिस्ता भारत के साथ नेपाल से भी है. कैसे यह नेपाल के बाद भारत आकर शिकार करने लगी ? इसका अंत कैसे हुआ ? कितने शिकार किये जिसकी वजह से गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसका नाम दर्ज हो गया ? जिम कॉर्बेट से इसका क्या रिस्ता है ? ये कहानी है दुनिया के सबसे खतरनाक नरभक्षी की, जिसकी चर्चा आज भी पहाड़ी इलाकों में सहमा देती है.

चम्पावत की आदमखोर बाघिन
चम्पावत की आदमखोर बाघिन

90 के दशक की यह घटना आज भी रोंगटे खड़ी कर देता है. भारत के इतिहास में सबसे बदनाम आदमखोर बाघिन को चंपावत की बाघिन कहा जाता है. इस आदमखोर ने सिर्फ भारत में 436 लोगों को मौत के घाट उतारा। यह आंकड़ा सिर्फ भारत का है पहले वह नेपाल में लोगों को अपना शिकार बना चुकी थी. नेपाल में तहलका मचाने के बाद खुद के शिकार हो जाने के डर वह भारत भाग आई. नेपाल की सीमा पार कर वह भारत में उत्तराखंड के चंवापत जिले में घुस गई. इसका खौफ इतना था कि रात अंधेरे में नहीं बलिक दिन दहाड़े लोगों के शिकार कर लेती थी. कहा जाता है की इसके जबड़े के ऊपर और निचे के दन्त टूट गए थे जिसकी वजह से वह आदमखोर बन गई थी. दरअसल दांत टूटने या शरीर कमजोर हो जाने के बाद जानवर का शिकार करना मुश्किल होता है जबकि इंसान या छोटे जानवर का शिकार आसान होता है.

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चम्पावत के अलावा चौगढ़ में आदमखोर बाघों के जोड़े ने लगभग 65 लोगों को मारा था. इस बाघिन का शावक भी इसलिए आदमखोर हो गया था क्योंकि वो अपनी मां के साथ में मनुष्यों का मांस खाया करता था। इन दोनों के अलावा चम्पावत की आदमखोर को जिम कॉर्बेट ने मारा था. ये ख़ौफ़नाक घटना भारत के चम्पावत एरिया में अंग्रेजी हुकूमत के समय घटी थी. एक अकेली बाघिन के इतने लोगों को अपना शिकार बनाने की इस घटना को गिनीज़ बुक ऑफ़ व‌र्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज किया जा चुका है. इसे 1907 में विश्‍व विख्यात शिकारी और बाद में सरंक्षक बने जिम कार्बेट ने मारा था। बाद में शिकारी जिम कॉर्बेट के नाम पार बाघों के संरक्षण के लिए पार्क बनाया गया. 1907 से 1946 तक प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्बेट ने चम्पावत क्षेत्र में ग्रामीणों को नरभक्षी बाघों के आतंक से निजात दिलाई थी।
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