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तथ्य बिना सत्य नहीं

टूलकिट मामला क्या है ? पक्ष-विपक्ष नहीं हर हिंदुस्तानी का सच जानना जरुरी है !

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टूलकिट मामला क्या है

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टूलकिट मामला क्या है ? पक्ष-विपक्ष नहीं, हर हिंदुस्तानी का सच जानना जरुरी है !

किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया गया टूलकिट मामला क्या है ? इसमें ऐसा क्या है की दिशा रवि को गिरफ्तार करना पड़ा ? 26 जनवरी हिंसा के दिन जो विपक्ष आरोपियों के गिरफ़्तारी की मांग कर रहा है था वो अचानक से जज बनकर फैसला क्यों सुनाने लगा ? जब 16 साल की ग्रेटा समझदार हो सकती है तो 21 साल की दिशा मासूम कैसे बन गई ? खालिस्तानी कनेक्शन से निकले सवालों की संख्या मामले की गंभीरता बताने के लिए काफी है. दिल्ली पुलिस के राडार पर लगभग 70 लोग है जिनमे नेता, पत्रकार, बुद्धिजीवी, न्यूज वेबसाइट सब शामिल है. देश के खिलाफ एक बड़े साजिस को समझने के लिए, टूलकिट की सच्चाई जानना काफी है.

टूलकिट मामला क्या है
टूलकिट मामला क्या है

टूलकिट दरअसल एक दस्तावेज की तरह होता है, जिसमे किसी प्रोग्राम, कम्पैन या टास्क का पूरा विवरण होता है. यह मामला पहली अंतराष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्त्ता ग्रेटा thumberg के ट्वीट से सामने आया. दरअसल ग्रेटा ने किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए एक टूलकिट शेयर किया. इस टूलकिट में किसान आंदोलन को दुनिया भर में फ़ैलाने, भारत में प्रदर्शन के तरीके, सोशल मीडिया कैंपेन, योग और चाय का बायकाट समेत कई ऐसी बातें लिखी गई थी. टूलकिट में मोदी या मोदी सरकार नहीं बल्कि भारत देश की छवि ख़राब करने की योजना स्पष्ट रूप से बनाई गई थी, जिसके तहत भारत विरोधी देशों के संसद और नेताओं का उपयोग, भारतीय दूतावासों का घेराव, समेत भारतियों की पहचान योग और चाय को पूरी दुनिया में बायकाट करने का प्रोग्राम बनाया गया था. पुलिस का दावा है की टूलकिट बनाने में दिशा का भी योगदान है.

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पुलिस के जांच में दिशा रवि के अलावा निकिता जोसेफ (Nikita Joseph) और शांतनु का नाम टूलकिट डॉक्युमेंट बनाने में सामने आया है. सबसे चौकाने वाली बात यह है की टूलकिट खालिस्तानी संगठन के मुखिया एम् ओ धारीवाल की सलाह पर बनाया गया था. पुलिस का दावा है की 11 जनवरी को दिशा, निकिता और शांतनु ने कनाडा में रहने वाले धारीवाल के साथ ज़ूम मीटिंग किया था. दिशा ने इसी दौरान ग्रेटा को यह टूलकिट भेजा था. दिशा के whatsapp चैट से यह बात सामने आई है की टूलकिट भेजने के बाद वह घबरा गई थी, उसके कहने पर ग्रेटा ने वो टूलकिट डिलीट कर दिया और एडिट करने के बाद दोबारा ट्वीट किया. दिशा ने ग्रेटा को बताया था की अगर यह टूलकिट सामने आया तो वह UAPA (देशद्रोह) के तहत गिरफ्तार हो सकती है. दिशा ने उसके बाद अपने whats app ग्रुप डिलीट कर दिया था जो खास इसी मकसद से बनाया गया था.

किसान आंदोलन में खालिस्तानी घुसपैठ की जाँच के दौरान 4 फरवरी को यह टूलकिट सोशल मीडिया में सामने आया था. इसमें 23 जनवरी को मीडिया पर और 26 जनवरी को ‘असली एक्शन करना है’ जैसी बातें लिखी थी. ध्यान रहे खालिस्तानी संगठन ने 26 जनवरी को लालकिले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को इनाम देने की घोषणा की थी. और गणतंत्र दिवस के दिन लालकिले पर जो हुआ वो पूरी दुनिया ने देखा. निकिता जोसफ फ़िलहाल कस्टडी से बहार है लेकिन पुलिस ने उनके घर से 2 लैपटॉप बरामद किए है. दिशा रवि ने ही ग्रेटा थनबर्ग से संपर्क किया या टूलकिट के लिए ग्रेटा से बात करना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन धालीवाल जैसे लोगों की सलाह की किया जरुरत थी.

पुलिस का दावा है ज़ूम मीटिंग में लगभग 70 लोग शामिल थे, जिनमे ज्यादातर चेहरा छिपाए हुए थे. इनमे कुछ नेता, पत्रकार और एक्टिविस्ट भी शामिल है. उनकी पहचान करने के लिए पुलिस ने गूगल से भी जवाब माँगा है. इस साजिश में कुछ न्यूज वेबसाइट के शामिल होने की भी आशंका है. शायद यही वजह है की अभी से दिशा की गिरफ़्तारी का विरोध हो रहा है.

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