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तथ्य बिना सत्य नहीं

नरसिंहानंद सरस्वती कौन है ? लव जिहाद ने नास्तिक दीपक को कट्टर हिन्दू बनाया ?

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नरसिंहानंद सरस्वती कौन है

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यति नरसिंहानंद सरस्वती कौन है ? लव जिहाद ने कैसे नास्तिक दीपक को कट्टर हिन्दू बनाया ?

यति नरसिंहानंद सरस्वती कौन है ? ग़ाज़ियाबाद के मंदिर में एक लड़के की पिटाई के बाद एक बार वो सुर्ख़ियों में है. वामपंथी मीडिया उन्हें कट्टर हिंदूवादी बुलाती है. जिस मंदिर के वो संरक्षक है वो गाज़ियाबाद के डासना में स्थित है. डासना एक मुस्लिम बहुल इलाका है जहाँ खुलकर हिंदुत्व की बात करने वाला कोई मामूली पुजारी तो नहीं हो सकता. नरसिंहानंद इससे पहले भी वामपंथी मीडिया के टारगेट पर रह चुके है. बहुत कम लोग उनकी ज़िन्दगी के बारे में जानते होंगे. आज हम आपको बताएंगे की विदेशों में पढाई और नौकरी छोड़कर दीपक त्यागी आखिर क्यों नरसिंहानंद सरस्वती बन गया ?

नरसिंहानंद सरस्वती कौन है
नरसिंहानंद सरस्वती कौन है

डासना में हिन्दुओं की आबादी मुस्लिम के मुकाबले बहुत कम है. ऐसे में जब भी कभी जात-पात की लड़ाई होती है तो यति नरसिंहानंद उसे सुलझाते है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की इलाके के हिन्दुओं में (किसी भी जाती) उनकी कितनी पैठ है. कई बार उन्हें जान से मारने की धमकी मिल चुकी है इसलिए हमेशा वो बंदूकों के साये में रहते है. सांप्रदायिक दंगे, अपनी सेना का गठन, हेट स्पीच और आर्म्स एक्ट के उन पर आधा दर्जन से भी अधिक केस दर्ज हैं। वो खुलकर कट्टर इस्लाम की आलोचना करते है इसलिए वो उनके निशाने पर भी है. डासना जैसे मुस्लिम बहुल माने जाने वाले इलाके में किसी हिन्दू महंत का यूँ टिकना सचमुच एक बड़ी कहानी कहता है।

नरसिंहानंद बनने से पहले उनका असली नाम दीपक त्यागी था. ‘मॉस्को इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल मशीन बिल्डिंग’ से मास्टर्स की डिग्री ली है। इसके बाद लंदन में उन्होंने बतौर इंजिनियर और मार्केटिंग टीम्स के हेड तौर पर नौकड़ी की । लगभग एक दशक गुजारने के बाद वो 1997 में भारत लौटे। भारत लौट कर वो गणित पढ़ाने लगे थे। 1992 में ‘ऑल यूरोप ओलम्पियाड’ में गणित से विजेता घोषित किया गया था. उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक रहा है. वो ‘अखिल भारतीय संत परिषद्’ के अध्यक्ष हैं और ‘हिन्दू स्वाभिमान’ नामक संस्था भी चलाते हैं। हिन्दू युवाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए उन्होंने ‘धर्म सेना’ का गठन किया। 3 वर्ष पहले गुरुग्राम में खुले में नमाज के विरोध में मुख्यमंत्री आवास के सामने वो अग्नि समाधि लेने पहुँचे थे, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

yati narsimhanand saraswati

बात 1997 की है, जब दीपक त्यागी विदेश से भारत लौट आया था । उनके दादा जी आजादी से पहले बुलंदशहर जिले के कांग्रेस के पदाधिकारी थे और पिताजी केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की यूनियन के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता थे। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत समाजवादी पार्टी की युथ ब्रिगेड का जिलाध्यक्ष बनने से की । सपा नेता के सफर तक हिंदुत्व से उनका कोई लेना देना नहीं था. विदेशों में पढाई करने वाले के लिए धर्म एक अन्धविश्वास से ज्यादा कुछ नहीं था. सपा नेता के तौर पर मेरठ के कई मुस्लिम युवा उनके दोस्त बन गए थे. उन्ही दिनों बीजेपी नेता श्री बैकुंठ लाल ने संसद की सदस्य्ता से इस्तीफा दिया था. उनकी मुलाक़ात बैकुंठ लाल शर्मा से हुई जिन्होंने मुसलमानों के अत्याचार की कहानिया सुनाई.

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बैकुंठ लाल की बातें उनके अंदर हिलोरे मार रही थी तभी अचानक उनसे एक कॉलेज की छात्र मिलने आई. उनका कार्यालय गाज़ियाबाद के शम्भू दयाल डिग्री कॉलेज के सामने था। वो लड़की उसी कॉलेज में पढ़ती थी जो त्यागी समाज से थी. पहली मुलाक़ात में उसने दीपक त्यागी को कुछ नहीं बताया सिर्फ रोइ और चली गई. कुछ दिन बाद वो लड़की दोबारा मिलने आई और अकेले में बात करने को कहा. रोते रोते उस लड़की ने जब अपनी आपबीती उनको बताई तो वो अंदर तक हिल गए. लड़की ने उन्हें बताया की उसकी दोस्ती क्लास की एक मुस्लिम लड़की से हो गयी थी जिसने उसकी दोस्ती एक मुस्लिम लड़के से करा दी।उन दोनों ने मिलकर उसके कुछ फोटो ले लिये थे और पुरे कॉलेज के जितने भी मुस्लिम लड़के थे उन सबके साथ उसको सम्बन्ध बनाने पड़े। उस लड़की को इतना ब्लैकमेल किया गया की वो लोग उसका प्रयोग कॉलेज के प्रोफेसर्स, अधिकारियो, नेताओ और शहर के गुंडों को खुश करने के लिये करते थे. सबसे चौकाने वाली बात ये थी उसकी तरह कई लड़कियां उनकी शिकार बनी थी लेकिन किसी ने मुंह नहीं खोला.
लड़की ने उन्हें बताया की सारे मुस्लिम लड़के लड़कियां मिले हुए थे और बहुत से हिन्दू लड़के भी अपने अपने लालच में उनके साथ थे और सबका शिकार हिन्दू लड़कियां ही थी। उस लड़की ने आखिर में जो बात कही उसने दीपक त्यागी को नरसिंहानंद सरस्वती बनने पर मज़बूर कर दिया. लड़की ने कहाँ की उसकी इस हालत की जिम्मेदार आप जैसे लोग है, जो समाज में तो हिन्दू उत्थान की बात करते है और साथ में ऐसे लोगों को लेकर घूमते है. दरअसल पहली बार उस लड़की ने अपनी आपबीती इसलिए उन्हें नहीं बताई क्युकी उनमे से कुछ मुस्लिम लड़की उनके ऑफिस या उनके साथ घूमते थे. जाते जाते उस लड़की ने कहा की ये मुसलमान किसी के पास लड़कियां भेजते हैं, किसी को मीट खिलाते हैं और किसी को पैसा देते हैं, आपको भी कुछ तो मिलता ही होगा। उसकी बातो दीपक त्यागी को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। ( उपरोक्त बातें खुद नर्सिम्हानद ने मीडिया को बताया है. )

ghaziabad dasna devi temple

उस लड़की से सवाल करते हुए दीपक ने कहा की इसमें हिन्दू मुसलमान की क्या बात है ? इस पर लड़की ने जवाब देते हुए कहा ये भी जिहाद है। दीपक ने पहली बार जिहाद शब्द उस दिन सुना था। इसके बाद दीपक ने इस पुरे मामले का पता किया तो एक एक बात सच निकली । इसके बाद दीपक को बीजेपी नेता प्रेम जी की बाते याद आई और उसने इस्लाम की किताबो और इतिहास का अध्ययन किया. बाद में उसकी लड़की की मौत हो गई, मौत का कारन स्पष्ट नहीं हुआ लेकिन जाते जाते उसने नास्तिक दीपक को हिन्दू नरसिंहानंद बना दिया. नरसिम्हा नन्द कहते है आज जो कुछ भी हूँ अपनी उसी बेटी के कारण हूँ जिसे मैंने जन्म नही दिया पर जिसने मुझे वास्तव में जन्म दिया। narsimhanand saraswati

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