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परीक्षा पे चर्चा विवाद : मोदी ने कठिन सवाल को पहले हल करने का सुझाव दिया ?

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परीक्षा पे चर्चा विवाद

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परीक्षा पे चर्चा विवाद : क्या पीएम मोदी ने कठिन सवाल को पहले हल करने का सुझाव दिया ?

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा विवाद में घिर गया है. हर साल की तरह इस बार भी 7, अप्रैल को पीएम ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया. अपने वर्चुअल कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने शक्षकों छात्रों और अभिभावकों के साथ बातचीत की। पीएम का चौथा ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम विवादों में घिर गया । सोशल मीडिया पर पीएम की आलोचना होने लगी. आरोप लगा की पीएम ने छात्रों को सलाह दिया की “परीक्षा में कठिन सवालों को पहले हल करना चाहिए”. आम तौर पर परीक्षा में हलके सवाल को पहले हल कर सुझाव हर कोई देता है. इसलिए देश का पीएम अगर कुछ गलत बोलता है तो विवाद होना निश्चित है. लेकिन क्या सच में पीएम ने ऐसा किया ? पढ़िए ये शानदार फैक्टचेक !

परीक्षा पे चर्चा विवाद
परीक्षा पे चर्चा विवाद

प्रधानमंत्री ने चौथी बार इस कार्यक्रम का आयोजन किया था, जो लगभग 90 मिनट तक चला. इस कार्यक्रम में विदेश में पढ़ने वाले छात्र भी जुड़े थे. कार्यक्रम के बाद पीएम के सलाह पर सोशल मीडिया पर बवाल हो गया. मोदी विरोधी नेताओ, रिटायर्ड अधिकारी, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने इसे आत्मघाती और गलत सलाह बताया. जिस मीडिया हाउस की रिपोर्ट (आज तक) के आधार पर पूरा बवाल मचा, कुछ घंटे बाद उसने वो रिपोर्ट ही वेबसाइट से हटा दी. सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों का जवाब जानने के लिए जब The Factshala ने फैक्टचेकक किया तो चौकाने वाली बात सामने आई.

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फैक्टचेक करने के दौरान हमे PIB की वेबसाइट पर पुरे कार्यक्रम का व्योरा और उसमे पूछे गए सवालों के जवाब मिले. कार्यक्रम के दौरान दूसरा सवाल विनीता गर्ग (टीचर, प्राइवेट स्कूल दिल्ली) ने पूछा था. उनके सवाल का जवाब देते प्रधान मंत्री ने कहा “मैं कहता हूं कि जब पढ़ाई की बात हो, तो कठिन जो है उसको पहले लीजिए, आपका mind fresh है, आप ख़ुद fresh हैं, उसको attend करने का प्रयास कीजिए. जब कठिन को attend करेंगे तो सरल तो और भी आसान हो जाएगा”. इस पुरे प्रश्न और उत्तर में कहीं परीक्षा की चर्चा नहीं है. ना तो टीचर ने परीक्षा का जिक्र किया है और ना ही प्रधानमंत्री. पीएम ने पढाई में कठिन विषय को पहले पढ़ने की सलाह दी है.

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पीएम ने अपना उदहारण देते हुए समझाया था की “मैं अपना अनुभव बताता हूं, जब मैं मुख्यमंत्री था, जब प्रधानमंत्री बना, तो मुझे भी बहुत कुछ पढ़ना पड़ता है, बहुत कुछ सीखना पड़ता है. बहुतों से सीखना पड़ता है. चीजों को समझना पड़ता है. तो मैं क्या करता था जो मुश्किल बातें होती हैं, जिसके निर्णय थोड़े गंभीर होते हैं. मैं मेरे सुबह जो शुरु करता हूं तो कठिन चीजों से शुरु करना पसंद करता हूं. मुश्किल से मुश्किल चीजें मेरे अफसर मेरे सामने लेकर आते हैं, उनको मालूम है कि वो मेरा एक अलग मूड होता है, मैं चीजों को बिलकुल तेजी से समझ लेता हूं,निर्णय करने की दिशा में आगे बढ़ता हूं. मैंने अपना एक नियम बनाया है, कोशिश की है. और जो सरल चीजें हैं दिनभर की थकान के बाद रात देर हो जाती हैं तो चलो भाई अब उनको मैं ज्यादा दिमाग खपाने की जरुरत नहीं वो गलती होने का कारण नहीं है. उन चीजों को फिर में देर रात तक खींच लेता हूं. लेकिन सुबह जब उठता हूं तो फिर कठिन से ही मुकाबला करने निकल पड़ता हूं.चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कठिन अध्यायों को पहले पढ़ने का सुझाव दिया न कि छात्रों को परीक्षा में कठिन प्रश्नों को पहले हल करने का।

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