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प्रंजॉय गुहा ठाकुरता विवाद : झूठी खबर छापने के लिए होंगे गिरफ्तार ?

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प्रंजॉय गुहा ठाकुरता विवाद

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प्रंजॉय गुहा ठाकुरता विवाद : झूठी खबर छापने के लिए होंगे गिरफ्तार ?

देश के बुद्धिजीवी पत्रकारों में प्रख्यात प्रंजॉय गुहा ठाकुरता विवाद का निपटारा गुजरात की एक अदालत ने कर दिया है. अडानी से पन्गा लेना उनको महंगा पड़ा है. दिलचस्प बात ये है की जिस पत्रिका में यह खबर छपी थी उसने खबर वापस ले ली है. प्रोन्जॉय गुहा ठाकुरता मोदी विरोधी पत्रकारों की लिस्ट में शामिल है. अक्सर वो मोदी को टारगेट करने वाली खबरें लिखते रहे है. उनका वह लेख आज भी The Wire के वेबसाइट पर मौजूद है. 2017 में उन्होंने मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए अडानी समूह के खिलाफ एक झूठी खबर लिखी थी. अडानी समूह ने उसी समय उस पत्रिका और लेखकों के खिलाफ मानहानि दावा करते हुए, मुकदमा दायर किया था.

प्रंजॉय गुहा ठाकुरता विवाद
प्रंजॉय गुहा ठाकुरता विवाद

प्रोन्जॉय के खिलाफ और भी एक ऐसा ही मामला कोर्ट में अभी चल रहा है. प्रोन्जॉय की मुश्किल ये है की उनके लेख के निचे अब प्रकाशक डिस्क्लेमर डाल देते है. उस डिस्क्लेमर में साफ साफ लिख दिया जाता है की ‘ये लेखक की निजी राय है. अडानी के खिलाफ जो खबर लिखी गई थी उसमे कोई फैक्ट नहीं था. इसलिए 19 जनवरी 2020 को भुज की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने इस धूर्त की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है. ठाकुरता ने 3 सालों तक अदालत में खबर से संबधित को कोई ऐसा सबूत नहीं दे पाए. अदालत ने दिल्ली पुलिस को कड़ा आर्डर देते हुए कहा पत्रकार प्रोंज्योय गुहा ठाकुरता को गिरफ्तार करके पेश करने का आदेश दिया है. आपको याद होगा इस खबर के बाद कई दिनों तक टीवी चैनलों पर बहस होते रही. वामपंथी इकोसिस्टम ने इसी खबर को आधार बनाकर मोदी को अडानी का दोस्त बना डाला.

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पिछले 6 सालो में राहुल गाँधी, अरविन्द केजरीवाल समेत कई पत्रकार अदालत में मांफी मांग चुके है. दरअसल इस नई परम्परा के अनुसार किसी भी सख्स के ऊपर झूठा इलज़ाम लगाने के माफ़ी मांग कर लोग बच निकलते है. लेकिन अडानी समूह ने माफ़ी मांगने के बावजूद केस वापस नहीं लिया है. कंपनी का दावा है की यह लेख गलती से नहीं बल्कि जानबूझकर कंपनी की छवि ख़राब करने के लिए लिखा गया था. ठाकुरता के खिलाफ “आईपीसी की धारा 500 के तहत आरोप तय किया गया है. ये गिरफ़्तारी वारंट 2017 में ‘इकोनॉमिक्स एंड पोलिटिकल वीकली’ पत्रिका में लिखे लेख के खिलाफ जारी किया गया है. अडानी के मानहानि दावे के बाद पत्रिका ने वो खबर वापस ले ली थी जिसके बाद अडानी समूह ने पत्रिका और बाकि सदस्यों के ऊपर से केस वापस ले लिया था. वारंट जारी होने के बाद उनके वकील ने उच्च न्यायलय में फैसले को चुनौती देने की बात की है. warrant-against-journalist

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