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तथ्य बिना सत्य नहीं

भगिनी निवेदिता : भारत में नहीं लेकिन भारत के लिए ही जन्मी थी !

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भगिनी निवेदिता

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भगिनी निवेदिता : भारत में नहीं लेकिन भारत के लिए ही जन्मी थी !

भगिनी निवेदिता को ज्यादातर लोग नहीं जानते है, जो जानते है वो स्वामी विवेकानंद की शिष्या के रूप में. इतिहासकारों ने बड़ी मुश्किल से तो विवेकानंद को भाव दिया, फिर उनके शिष्या के बारे में कितना लिखा होगा आप समझ सकते है. भगिनी सिर्फ विवेकानंद की सबसे भरोसेमंद और सच्ची शिष्या ही नहीं, बल्कि स्वंत्रतता आंदोलनकारी भी थी. निवेदिता गुलाम भारत के अनपढ़ लोगो को शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए खूब काम किया. भारतियों पर अंग्रेजी हुकूमत के जुल्म के बाद वह आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो गई.

भगिनी निवेदिता
भगिनी निवेदिता

राष्ट्रवाद : एक सैनिक के साथ जो हुआ, आप वहां होते तो क्या करते ?

1904 में पहली बार भारत का ध्वज निवेदिता ने बनाया था. उस समय के झंडे में लाल और पिली रंग की पट्टी के साथ वज्र को चित्रित किया था. 1906 में भगिनी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए लेख लिखना शुरू किया. उस समय वो न्यू इंडिया, प्रभुद्ध भारत, संध्या और युगांतर जैसे पत्रों में लिखती थी. 1905 में लार्ड कर्जन के बंगाल विभाजन के बाद वो वहां के स्वदेशी आंदोलन में जुड़ गई. भगिनी को अलग अलग सभाओं में भाषण के लिए बुलाया जाता था. इसी साल वो गोपाल कृष्ण गोखले के सभाओं में भी मिली.

bhagini nivedita
bhagini nivedita

देशभक्ति का इससे अच्छा उदहारण नहीं हो सकता, की उन्हें रबीन्द्रनाथ टैगोर ने “लोकमाता” कहा था. बंगाल में उनके काम को देखकर रबीन्द्रनाथ टैगोर ही नहीं बल्कि सुभाष चंद्र बोस भी काफी प्रभावित थे. सुभाष चंद्र बोस खुद भगिनी निवेदिता को अपने देश प्रेम का कारन बताया था. बोस ने निवेदिता के बारे में बोलते हुए कहा था की “मैंने विवेकानंद को पढ़कर भारत से प्रेम करना सीखा, और स्वामी को समझा उनकी शिष्या निवेदिता के पत्रों से” !
Margaret Elizabeth Noble
Margaret Elizabeth Noble

निवेदिता के बारे में सबसे बड़ी बात स्वामीनाथन गुरुमूर्ति जी ने कहा था. गुरुमूर्ति के अनुसार ” भगिनी निवेदिता भले ही भारत में पैदा नहीं हुई लेकिन उसका जन्म भारत के लिए ही हुआ था”. निवेदिता का भारत के प्रति प्रेम उनकी लिखी पुस्तकों में दिखती है. “काली द मदर” क्रेडिल टेल्स ऑफ़ हिन्दुइस्म” और “रिलिजन एंड धर्म” जैसी कई किताबें लिखी थी. 13 अक्टूबर 1911 में दार्जिलिंग (बंगाल) में तबियत ख़राब होने की वजह से उनका निधन हो गया. भगिनी निवेदिता का असली नाम मार्गरेट एलिजाबेथ नोबुल था. मार्गरेट एलिजाबेथ नोबेल का जन्म 28 अक्टूबर 1867 को आयरलैंड में हुआ था। Sister_Nivedita

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2 thoughts on “भगिनी निवेदिता : भारत में नहीं लेकिन भारत के लिए ही जन्मी थी !

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