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भारत चीन सीमा विवाद : भारत के सामने 3 साल में 2 बार घुटने टेक चूका है ड्रैगन !

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defence ministry meeting

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भारत चीन विवाद : भारत के सामने 3 साल में 2 बार घुटने तक चूका है ड्रैगन !

# चीन के सैन्य ताकत की हक़ीक़त ?
# डोकलाम से लद्दाख आते आते बदल गया चीन !

भारत चीन सीमा विवाद पर पूरी दुनिया की नजर बनी है. भारत के मित्र देशों से लेकर शत्रु तक सब के सब आश्चर्यचकित है की कैसे पुरे महीने सीमा विवाद पर चीनी मीडिया से लेकर चीन आर्मी तक सबने वैसा अग्रेशन नहीं दिखाया जैसा दोकलाम के समय में था. लगभग एक महीने बाद चीनी सैनिकों को नियंत्रण रेखा से आखिरकार पीछे हटना पड़ा. हालाँकि कुछ भारतीय पूर्व सैन्य अधिकारीयों ने लेख लिखकर यह आरोप लगाया की चीन की सेना भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ कर चुकी थी जिसे भारतीय सेना ने सिरे से ख़ारिज कर दिया. चीन की सेना को भारतीय सेना ने मजबूती से सामना करते हुए मुहतोड़ जवाब दिया. भारत सरकार के सफल निति और सेना के कौशल की वजह से चीन के पास पीछे हटने के अलावे कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इससे पहले डोकलाम में भारत चीन सीमा विवाद लगभग 2 महीने तक चला था आखिरकार वहां भी चीनी सैनिको को पीछे हटना पड़ा था.

india china border map
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डोकलाम में भारत चीन विवाद !
नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल 2017 में पीपुल्स लिबेरेशन आर्मी ने भारत चीन सीमा से सटे भूटान के डोकलाम पहाड़ी में अपना तम्बू गाड़ दिया था. उस समय भारत सरकार ने इसका पुरजोर विरोध किया. दरअसल चीन की फितरत में विस्तारवाद शामिल है, भारत ही नहीं चीन से लगने वाले सभी देशों की सीमा में घुसकर जमीं हथियाने के फ़िराक में रहता है ड्रैगन. जहाँ उसे थोड़ी सी ढील मिलती है वहां पर वो हावी हो जाता है. 2017 में भारत ने चीन को बताया की वो भारतीय सीमा से सटे किसी भी जगह पर घुसपैठ बर्दास्त नहीं करेगा. 2017 में लगभग 70 दिनों तक चले विवाद का अंत आखिरकार चीनी सैनिको के पीछे हटने से ख़त्म हुआ. उस समय भी भारत की राजनैतिक पार्टियां और विचारधारा से ग्रसित भारतीय मोदी को निशाना बनाते हुए भारत सरकार पर तंज कस रहे थे. तब तो चीन कम से कम 70 दिनों तक टिका रहा लेकिन लद्दाख मुद्दे पर सिर्फ एक महीने में उसकी हवा निकल गई. भारत नेपाल विवाद में सोनिया गाँधी की क्या भूमिका है ?

डोकलाम से लद्दाख आते आते बदल गया चीन !
2017 के मुकाबले 2020 का भारत चीन सीमा विवाद पर नजर डाले तो चीन की प्रतिक्रिया काफी सधी हुई और नाप तौलकर आई है. भारत के वामपंथियों को छोर दे तो चीन ने कोई ऐसी प्रतिक्रिया उसके बिलकुल विपरीत थी. डोकलाम के समय जो चीन अपने मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये भारत बार बार 1962 की याद दिला रहा था, लद्दाख के समय वो बिलकुल खामोस रहा. चीन का बदला हुआ मिजाज शायद इसलिए था क्युकी उसे डर था की माहौल बनाने के बाद भी जिस तरह भारत डोकलाम मुद्दे पर अड़ा रहा और पूरी दुनिया में चीन की जगहंसाई कम से कम इस बार उस शर्मिदगी से बच जाए. इस बार चीन के एक दो लेख को छोर दे आधिकारिक रूप से या चीनी मीडिया ने भी नाप तौलकर कर कवरेज की. हां चीन से ज्यादा भारतीय वामपंथी जरूर सक्रीय थे. इस विचारधारा ने फेक न्यूज फैलाकर देश में एक माहौल बनाने की कोशिश जरूर की लेकिन सिर्फ 30 में ड्रैगन ने घुटने टक्कर उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. भारतीय वामपंथियों से बिलकुल उलट चीन ने इस मुद्दे पर फेक न्यूज को लेकर खुद पहल करते हुए चीनी सोशल मीडिया आप “वीबो” से भारत चीन सीमा विवाद से जुड़े कंटेंट हटवा दिया.

defence ministry meeting
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क्या है भारत चीन लद्दाख सीमा विवाद
एक महीने के अंदर सीमा से ड्रैगन सैनिको के पीछे हटने की पुष्टि स्वयं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नई की. विदेश मंत्रालय प्रवक्ता च्युइंग हुआ ने बताया की भारत चीन के कूटनीतिक और सैन्य प्रशासन ने काफी सकारात्मक बातचीत करते हुए मुद्दे को सुलझा लिया है, बाकि बचे मुद्दे का निपटारा जल्द हो जाएगा.चीनी प्रवक्ता ने माना फ़िलहाल चीन आपसी झड़प को बड़े विवाद में तब्दील करने के मूड में नहीं है.दरअसल एलएसी पर भारत सीमा में हो रहे निर्माण कार्य को रोकने के लिए चीन दबाव बनाने के लिए इस विवाद को जन्म दिया. भारत चीन सैन्य अधिकारीयों की मीटिंग से पहले ही भारत यह स्पष्ट कर चूका था की वो अपनी सीमा में चल रहे निर्माण कार्य पर किसी भी कीमत पर रोक नहीं लगाएगा. भारत एलएसी पर दौलत बेग के ओल्डी क्षेत्र में कई सालों से रुके हुए निर्माण कार्य को तेजी से कर रहा है. इस निर्माण को रोकने के लिए चीन ने भारतीय सीमा में घुसपैठ के इरादे से आगे बढ़ा था. फ़िलहाल पेंगोंग त्सो क्षेत्र को छोड़कर दोनों सेनाए अपने अपने बेस पर पीछे लौट चुकी है.india china standoff

indian army chief narvane
indian army chief narvane

चीन के सैन्य ताकत की हक़ीक़त ?
चीन में जनसंख्या नियत्रण कानून की वजह से उसके सेना में ज्यादातर ऐसे सैनिक भरे पड़े है जिन्होंने कभी कोई युद्ध नहीं लड़ा. भारत की तुलना में चीन की सैन्य ताकत आंकड़ों में बेशक ज्यादा है लेकिन जवानों के हौसले और युद्ध कला में माहिर भारतीय सैनिको के सामने चीनी सैनिक कितनी देर टिक पाएंगे इसका अंदाजा खुद चीनी विशेषज्ञों को भी नहीं है. खुद चीन के विशेषज्ञ मानते है आज के चीनी सैनिक सिर्फ कागजी शेर है. एक चीनी वेबसाइट thepaper.cn में चीनी सैन्य विशेषज्ञ ने अपनी लेख में लिखा है की आज के दौर में पठार और पहाड़ी क्षेत्र में युद्ध के लिहाज से भारतीय सेना दुनिया की सबसे बेहतर सेना है. हुआंग के अनुसार पहाड़ी इलाकों में लड़ाई करने में भारतीय सैनिको का मुकाबला दुनिया के सबसे बेहतर फ़ौज अमेरिका और रूस भी नहीं कर सकते. भारत के युद्ध इतिहास पर नजर डालें तो 1962 से लेकर 1999 तक भारत ने जितने युद्ध किये है सबमे भारतीय सैनिको ने अपने अदम्य साहस की बदौलत पराक्रम दिखाया है. सिमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 1999 में भारतीय सेना कारगिल में जो पराक्रम दिखाया था चीन उसे कैसे भूल सकता है. चीन सेना में शामिल अधिकांश अधिकारीयों ने युद्ध का मुंह नहीं देखा जिनको अनुभव है वो या तो रिटायर हो चुके है या फिर होने वाले है. लद्दाख से इतनी जल्दी पीछे हटने की एक वजह ये भी हो सकती है अगर लदाख में युद्ध हुआ और चीन सेना को भागना पड़ा तो चीन की सैन्य ताकत की पोल खुल जाएगी. 2017 डोकलाम के बाद 2020 लदाख में चीन का पीछे हटना इस बात की तरफ इशारा करता है की ड्रैगन सिर्फ संख्या बल पर कागजी शेर के भांति सबको डरना चाहता है किसी से लड़ना भिड़ना नहीं चाहता खासकर भारत से तो बिलकुल नहीं.

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