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तथ्य बिना सत्य नहीं

महाराष्ट्र पुलिस वसूली केस : सरकार का मूल आधार ही करप्ट, कॉम्युनल और क्रिमिनल लोग हैं।

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महाराष्ट्र पुलिस वसूली केस

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महाराष्ट्र पुलिस वसूली केस : सरकार का मूल आधार ही करप्ट, कॉम्युनल और क्रिमिनल लोग हैं।

महाराष्ट्र पुलिस वसूली केस ने भारतीय राजनीती को एक बार फिर शर्मिंदा किया है. महाराष्ट्र की बेमेल गठबंधन वाली सरकार का मूल आधार ही करप्ट, कॉम्युनल और क्रिमिनल लोग हैं। इसलिए इसके बावजूद कि मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमवीर सिंह स्वयं भी अव्वल दर्जे के करप्ट और क्रिमिनल ब्रेन के व्यक्ति जान पड़ते हैं, राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर लगाए गए उनके आरोपों के गलत होने की संभावना नगण्य ही प्रतीत होती है।

महाराष्ट्र पुलिस वसूली केस
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केवल महाराष्ट्र ही नहीं, लगभग पूरे देश में पुलिस वालों को विभिन्न जिम्मेदारियां दिए जाने का आधार ही आज वसूली टारगेट पूरा करने की उनकी क्षमता से जुड़ा हुआ होता है। थानों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक बिकते हैं और यह एक किस्म का ओपन सीक्रेट है। इसलिए गृह मंत्री अनिल देशमुख पर एनआईए द्वारा गिरफ्तार अफसर सचिन वाजे को प्रति माह 100 करोड़ रुपए का वसूली टारगेट दिये जाने का आरोप हैरान नहीं करता है।

राजनीतिक नज़रिए से देखें, तो खुद प्रधानमंत्री मोदी एनसीपी को “नेचुरली करप्ट पार्टी” की संज्ञा दे चुके हैं। इसलिए अनिल देशमुख स्वयं तो ज़रूर खाते होंगे, लेकिन अपने आला नेताओं को नहीं खिलाते होंगे, यह लगभग असंभव है। जब भी कोई सरकार बनती है, तो कुछ मंत्रालयों के लिए जो विशेष खींचतान हुआ करती है, वह इसीलिए कि वे कुछ मंत्रालय विशेष मलाईदार हुआ करते हैं। और किसी राज्य में गृह और वित्त मंत्रालयों से अधिक मलाईदार मंत्रालय और कौन हो सकते हैं?

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बहरहाल, परमवीर सिंह के खुलासे से एक बात तो स्पष्ट है कि वेश्यावृत्ति से भी बदतर हो चुकी राजनीति में आज अनेक सरकारें और उनके मातहत पुलिस विभाग भी वास्तव में संगठित आपराधिक गिरोहों का ही रूप धारण कर चुके हैं। और जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो जनता का तो भगवान ही मालिक है। इसीलिए आप देखते हैं कि कोविड से नागरिकों की जान बचाने समेत तमाम मोर्चों पर विफल सरकार के लोग भी मलाई चाटने में व्यस्त हैं।

मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि यूं तो इस देश में शायद ही कोई सरकार ईमानदार होगी, लेकिन मौजूदा महाराष्ट्र सरकार से अधिक भ्रष्ट सरकार की कल्पना करना भी इस कलियुग में संभव नहीं है। हां, अगर कलियुग से भी ज़्यादा पतित कोई युग आएगा, तो शायद महाराष्ट्र सरकार से ज़्यादा भ्रष्ट और आपराधिक सरकार लोगों को देखने को मिल सकती हैं।

और अंतिम सत्य यह, कि आज की लगभग पूरी की पूरी राजनीति ही वसूली गिरोहों द्वारा चलाई जा रही है। धन्यवाद।

#सत्य_नहीं_होता_सुपाच्य
वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार के कीबोर्ड से ( सोशल मीडिया प्लेटफार्म )
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