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तथ्य बिना सत्य नहीं

मुग़ल धरोहरों की सच्चाई : अगर हिंदुस्तान में मुग़ल नहीं होते तो क्या होता ?

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मुग़ल धरोहरों की सच्चाई

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मुग़ल धरोहरों की सच्चाई : अगर हिंदुस्तान में मुग़ल नहीं होते तो क्या होता ?

वामपंथियों के मुग़ल महिमामंडन से इत्तर, मुग़ल धरोहरों की सच्चाई कुछ और ही है. अक्सर आपने ये तर्क सुना होगा की मुग़ल नहीं होते तो शायद हिंदुस्तान की अपनी कोई धरोहर नहीं होती. मुग़ल के बाद जब अंग्रेज आये तो उन्होंने भी अपनी बनाई इमारतों का रंग लाल ही रखा. क्यूंकि अंग्रेजों की संख्या कम थी, इसलिए उन्होंने जनता के मन में शासक वाली छवि बनाये रखना चाहते थे. अंग्रेजो ने भी अपनी इमारतों में जानबूझकर मुग़ल आर्किटेक का डिज़ाइन शामिल किया. तो जानिए अगर हिंदुस्तान में ताजमहल या लालकिला नहीं होता तो दुनिया का कोई अजूबा भारत में होता ?

मुग़ल धरोहरों की सच्चाई
मुग़ल धरोहरों की सच्चाई

हिंदुस्तान में पहली बार बन्दूक और तोप का इस्तेमाल बाबर ने किया था. बाबर ने ही पहली बार युद्ध का तरीका बदला था. हिंदुस्तान में शेरो शायरी का चलन मुग़लों ने ही शुरू किया था. इससे पहले यहाँ कविताएं और कहानी लिखी जाती थी. हिंदुस्तानी संगीत में खयाल गायकी का चलन उनके समय में शुरू हुआ. हिंदुस्तान का इतिहास लिखते समय, लिखने वालो ने जाने अनजाने में अपने सोच के हिसाब से मिलावट कर दी. इनमे से कुछ कल्पनाएं सच बना दी गई, और सच को मिथक बना दिया. अक्सर गंगा जमुनी तहज़ीब और उर्दू को को मुग़ल की दें बताई जाती है. लेकिन उर्दू हो या गंगा जमुनी तहज़ीब ये सब बाबर के आने से पहले हिंदुस्तान की विरासत थी. बाबर से 250-300 साल पहले ही आमिर खुसरो ने उर्दू की शुरुआत की थी. उसी समय निजामुद्दीन औलिया का भी जिक्र आता है, जिनकी मज़ार को आज भी हिन्दू मुस्लिम विरासत का प्रतिक माना जाता है. अकबर ने दरअसल अपने से पहले मौजूद दरगाहों और मज़ारो की संस्कृति को बढ़ाया, हिन्दू मुस्लिम एकता अकबर की थ्योरी नहीं थी.

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कुछ इतिहासकारों के मुताबिक अकबर ने गुजरात जीतने के बाद गोवा की तरफ बढ़ने की कोशिश की लेकिन पुर्तगालियों की बेहतर नौसेना ने उसके मनसूबे पर पानी फेर दिया. आखिर में अकबर को पुर्तगालियों से समझौते करने पड़े. बाबर दरअसल 1526 में हिंदुस्तान आया था, जबकि वास्को डी गामा 1498 में हिंदुस्तान आया था. इसलिए यह धरना सरासर गलत है की यूरोपियन बाद में आये और मुग़ल पहले. हिंदुस्तान में जिन खाने की चीजों को मुग़लों की दें बताया जाता है उनमे से ज्यादातर मुग़लों के है ही नहीं. मुग़लई कबाब और निहारी जैसे खाने का ईजाद उनके बाद के नवाबो और जमींदारों ने किया था.
कहा जाता है की बाबर को हिंदुस्तान से प्रेम था. इस बात में कितनी सच्चाई है इसका वर्णन खुद बाबर ने किया है. उसने अपनी डायरी तुजुके बाबरी में लिखा है “हिंदुस्तान दिलचस्प मुल्क है. यहां के लोग खूबसूरत नहीं हैं. सामाजिक तानाबाना भी बहुत समृद्ध नहीं है. लोगों में शायरी करने का हुनर नहीं है. तमीज़, तहज़ीब और बड़ा दिल नहीं है. कला और शिल्प में सही अनुपात नहीं है. अच्छे घोड़े, मीट, अंगूर, तरबूज़ यहां नहीं होते. बाज़ारों में रोटी, अच्छा खाना या बर्फ नहीं मिलती है. गुसलखाने और मदरसे नहीं हैं.” इसके अलावा उसने आम (फल) और हिन्दुस्तानियों के पास मौजूद सोने की तारीफ की है.

hindu temple
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हिंदुस्तान में जब भी मुग़लों के आतंक की चर्चा होती है तो उनके द्वारा बनाये गए इमारतों को उसका ढाल बनाया जाता है. कहा जाता है की मुग़ल इमारते ना होती तो हिंदुस्तान में कुछ नहीं होता. इस बात में थोड़ी सी सच्चाई तो हो सकती है लेकिन ये कहना सरासर गलत होगा की मुग़ल ना होते तो हिंदुस्तान का कोई धरोहर नहीं होता. दरअसल अंग्रेजों के लिखे गए इतिहास ने मुग़लों के अलावा बनाये गए तमाम विरासतों को हिन्दुस्तानियों से दूर कर दिया. हिंदुस्तान में अगर ताजमहल नहीं होता तो खजुराहो के मंदिर, दक्षिण के भव्य मंदिर, तंजौर की मूर्ति कला, अजंता, ऐलोरा की गुफाएं, सांची का स्तूप, मौजूद होते. इसके अलावे बीजापुर का गोल गुंबद और उड़ीसा के मंदिर जैसी कई खूबसूरत रचनाये मौजूद है.

बिरयानी को भी बाबर से जोड़ा जाता है. जबकि बिरयानी एक फ़ारसी शब्द है जीका मतलब बिरिंज बिरियाँ यानि तला हुआ चावल होता है. बिरयानी आज भारत का सबसे प्रसिद्ध डिश है. बाबर एक तुर्की शाशक था जबकि बिरयानी फ़ारसी खाना इसलिए दोनों का को मेल नहीं. हिंदुस्तान में हैदराबादी बिरयानी और लखनवी बिरयानी काफी मशहूर है. बाद के मुगल बादशाह पुलाव के शौकीन थे.

इतिहास हमेशा जितने वाले का लिखा जाता है, अगर दुर्योधन और हिटलर जैसे शासक भी जित जाते तो शायद उनको भी सिकंदर और अशोक की तरह महान मान लिया जाता. आज भी भारत में दाराशिकोह और औरंगजेब को गुड और बाद मुग़ल की चर्चा होती है. ये सब अनंत काल से चला आ रहा है. इससे पहले कम्युनिस्ट और उससे पहले अंग्रेज़ इतिहासकारों ने अपनी-अपनी विचारधारा और सहूलियत के हिसाब से इतिहास को लिखा और व्याख्या की. बाबर ने भारत में पहली बार मुग़ल सल्तनत की नींव राखी थी, मुग़लों ने हिंदुस्तान को कुछ धरोहर तो जरूर दिए लेकिन उससे कई गुना ज्यादा हिंदुस्तान से लूटा भी.
mughal achivements

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