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तथ्य बिना सत्य नहीं

मोदी बांग्लादेश बयान फैक्टचेक : क्या बांग्लादेश आंदोलन के लिए मोदी जेल गए ?

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मोदी बांग्लादेश बयान फैक्टचेकक

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मोदी बांग्लादेश बयान फैक्टचेक : क्या बांग्लादेश के लिए मोदी जेल गए ?

मोदी बांग्लादेश बयान फैक्टचेक करने की जरुरत खुद पीएम के एक बयान से पड़ी. बंगाल चुनाव के बीच प्रधानमंत्री का बांग्लादेश दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था. बांग्लादेश की आज़ादी के 50 वर्ष पुरे होने पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे मोदी मुख्य अतिथि बने. इस कार्यक्रम में पीएम ने भाषण देते हुए कहा की ‘बांग्लादेश सत्याग्रह के लिए वो जेल जा चुके है’. पीएम का यह बयान भारत में खूब वायरल है, विरोधी इसे ‘एक और झूठ’ बता रहे है तो समर्थक सच बता रहे है. क्या सच में प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के लिए आंदोलन किया था ?

मोदी बांग्लादेश बयान फैक्टचेकक
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प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में भाषण देते हुए कहा ‘वे 20-22 साल के थे तो उन्होंने बंगलादेश की आज़ादी के लिए आन्दोलन में हिस्सा लिया था’. उनके बयान के बाद मोदी विरोधियों ने सवाल उठाते हुए इसे झूठा करार दे दिया. फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर इस बत पार हल्ला मचा हुआ है कि नरेंद्र मोदी ने गलतबयानी की. जवाब में मोदी समर्थक प्रधानमंत्री की लिखी एक किताब ‘संघर्ष मा गुजरात’ (गुजराती भाषा) की तस्वीर साझा कर रहे है. इस किताब के बैक पेज कवर (पिछले हिस्सा) में लिखा है ‘बांग्लादेश सत्याग्रह में तिहाड़ जेल जा चुके है’. यह किताब 1978 में खुद मोदी ने लिखी थी. किताब के बैक कवर पर यह उन्होंने अपने परिचय में लिखा है. भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी इस किताब का जिक्र करते हुए इसे सही बताया है.

Modi bangladesh bayan factcheck
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आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और मनीष सिसोदिया ने भी मोदी के इस दावे पर सवाल उठाए है. नरेंद्र मोदी के इस दावे का शायद ही कोई सरकारी रिकॉर्ड हो, इसलिए उनके विरोधी और समर्थक दोनों सोशल मीडिया पर एक दूसरे को झूठा बता रहे है. तो क्या बांग्लादेश की आज़ादी के लिए कोई आंदोलन नहीं हुआ ? क्यूंकि मोदी को झूठा बताने वाले ऐसे किसी आंदोलन को ही ख़ारिज कर रहे है. मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने सत्याग्रह को ही कटघरे में खड़ा कर दिया. नरेंद्र मोदी का विरोध या समर्थन के लिए किसी तथ्य की जरुरत तो है नहीं इसलिए कुछ भी लिखा जा सकता है. 26 मार्च 1971 को शेख मुजीब ने बांग्लादेश स्वंतंत्रता की घोषणा की थी. बाद में पाकिस्तानी फौज की वजह से मुख्यालय कलकत्ता शिफ्ट कर दिया गया .
news paper cutting : twitter
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कलकत्ता में बांग्लादेश सरकार की स्थापना के बाद कई यूनिवर्सिटी में छात्रों ने बंगलादेश की सरकार को मान्यता देने के लिए जुलुस निकला था. इंदिरा गांधी बांग्लादेश को मान्यता देने के लिए सही समय का इंतज़ार कर रही थी. यही वो समय था जब बंगलादेश के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी पार्टी से धरने प्रदर्शन का आव्हान किया था. देश के अन्य शहरों की तरह (जहाँ जनसंघ मजबूत थी) दिल्ली में संसद भवन के सामने 1971 में एक सभा भी हुयी थी. इस सभा के लिए देश भर से जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्त्ता दिल्ली आये थे. इंदिरा गाँधी खुद बांग्लादेश समर्थक थी. गणतंत्र दिवस से ठीक पहले सुरक्षा के लिहाज दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए लोगों की गिरफ्तारियां भी होती थी. हो सकता है कि गुजरात से जो टीम आयी हो उसमें नरेंद्र मोदी भी शामिल रहे हों. कहा जाता है की इंदिरा गाँधी खुद ऐसे प्रदर्शनों की समर्थक थी.

इंदिरा गांधी भी ऐसी रैलियों को प्रोत्साहित कर रही थीं. मुक्ति संग्राम में तो भारतीय सेना और मुक्तिबाहिनी के लोग शामिल हुए थे। बांग्लादेश के साथ भारत के लोग भी समर्थन कर रहे थे। उस समय धरना प्रदर्शन करने वालों को बोट क्लब, मंदिर मार्ग या संसद मार्ग थाने ले जाए जाते थे. हिरासत में लेने के बाद शाम तक सबको छोर दिया जाता था. 1971 में नरेंद्र मोदी एक साधारण कार्यकर्त्ता रहे होंगे. इसलिए हो सकता है की मोदी जो दावा कर रहे हों वो सच हो. इसके अलावा उनकी लिखी किताब का समय (१९७८) भी महत्वपूर्ण है. उसमे लिखे हुए शब्दों को झूठ बताया जा सकता है लेकिन समय को नहीं.

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