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तथ्य बिना सत्य नहीं

यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद : जहाँ से निकले आतंकवादियों पर गर्व किया जाता है ?

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यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद

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यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद : जहाँ से निकले आतंकवादियों पर गर्व किया जाता है ?

यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद पुरे दुनिया के आतंकियों के लिए गर्व का प्रतीक है. पूरी दुनिया को आतंक का परिचय इस शैक्षणिक संसथान ने करवाया था. आतंकवाद का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहला ख्याल पाकिस्तान का आता है. कुछ सालो पहले तक दुनिया के जिन देशों को शक था आज वो पाकिस्तान को जान चुके है. पाकिस्तान स्थित दारुल उलूम हक्कानिया कॉलेज को पूरी दुनिया यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद के नाम से जानती है. यह उपनाम भारत या किसी और देश ने नहीं दिया बल्कि तथ्यों के आधार पर AFP प्रेस ने दिया है. क्यों दारुल उलूम हक्कानिया को जिहाद का यूनिवर्सिटी क्यों कहा जाता है ? कई सबूत है जिससे यह साबित होता है की, कई आतंकी घटनाओं से इस धार्मिक संसथान का सीधा सम्बन्ध है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद
यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद

chinese conspiracy : sudden influx of weapons occur in Kashmir.

तालिबान, अलकायदा, और लश्कर-ए-तैयबा, यही वो संगठन है जिन्होंने आतंक की शुरुआत की थी. आज पूरी दुनिया में कई आतंकी संगठन मौजूद है. पाकिस्तान में आतंकी हो या उनके आका सबको पनाह मिलती है. दुनिया के सबसे बड़े आतंकी ओसामा बिन लादेन हो या हाफिज सईद सबका सेफ ठिकाना पाकिस्तान है. इन संगठनों को राजनीतिक और सेना दोनों का संरक्षण मिलता है. यही कारन है की FATF (दुनिया को कर्ज देने वाली संस्था) ने उसे 2 साल से ग्रे लिस्ट में रखा है. FATF के कारन मजबूरन पाकिस्तान को स्वीकार करना पड़ा की दाऊद इब्राहिम समेत 40 से ज्यादा आतंकी उसके हयं है. एएफपी (न्यूज़ एजेंसी) ने हाल ही में एक रिपोर्ट में दारुल उलूम हक्कानिया को यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिहाद बताया है.

दारुल उलूम हक्कानिया
दारुल उलूम हक्कानिया

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या में दारुल उलूम हक्कानिया और उसके छात्रों का नाम सामने आया था. AFP ने अपने विस्तृत रिपोर्ट में बताया है की कैसे यह संस्थान छात्रों को इस्लामी जिहाद के लिए ब्रेन वाश करके उन्हें आतंकी संगठनों में शामिल करवाता है. इस मदरसे में से निकली तालिबानी आतंकियों की किस्से बड़े शान से छात्रों को बताया जाता है. पाकिस्तान के पेशावर से 60 किलोमीटर दूर अकोरा खट्टक में स्थित हक्कानिया मदरसे का कैंपस है. यहाँ लगभग 4000 छात्रों को मुफ्त खाना, हॉस्टल और कपडे दिए जाते है. 1947 में मौलाना अब्दुल हक़ ने इस मदरसे की शुरुआत की जिसके बाद 1980 से इस मदरसे से अवैध गतिविधियां शुरू हुई. 2014 में जब पूर्व पीएम नवाज़ शरीफ के खिलाफ पाकिस्तान में हो रहे प्रदर्शन हो रहे थे तब इसी मदरसे ने उनकी मदद की थी. पेशावर आर्मी स्कूल पर आतंकी हमले में उसी तालिबान का हाथ था जिसको इस मदरसे ने कई लीडर दिए थे.
university of jihad
university of jihad

इस मदरसे को पाकिस्तान सरकार हर साल सैकड़ों करोड़ रूपये आर्थिक मदद देती है. 2016 – 2017 में 300 मिलियन तो 2018 में 277 मिलियन का डोनेशन दिया था. आरोप है तालिबानी समर्थक इस मदरसे पर पाकिस्तान के तलत्कलीन पीएम इमरान खान सबसे ज्यादा मेहरबान है. आफ्गानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान को ऑफिसियल खत लिखकर इस मदरसे को बंद करने की मांग की है. अभी कुछ दिन पहले ही आफ्गानिस्तान में तालिबानी विद्रोह के समर्थन में इस मदरसे ने एक वीडियो भी जारी किया था. कबूल सरकार ने उस समय काफी नाराज़गी भी जताई थी. सादिक़ सिद्दीक़ी (प्रवक्ता अशरफ गनी, राष्ट्रपति) ने खुलकर आरोप लगाया की पाकिस्तान सरकार ऐसे मदरसों के जरिये जिहादियों की फ़ौज तैयार कर रही है. यहाँ से निकले तालिबानी आफ्गानिस्तान में आतंक फैला रहे है.
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