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राजा मानसिंह हत्याकांड : वो घटना जिसने राजीव गाँधी सरकार को हिला दिया.

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राजा मान सिंह के हत्या की कहानी

राजा मान सिंह के हत्या की कहानी

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राजा मानसिंह हत्याकांड : वो घटना जिसने राजीव गाँधी सरकार को हिला दिया था.

राजा मानसिंह हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के मथुरा की जिला अदालत ने 35 साल बाद फैसला सुनाया. राजस्थान के भरतपुर में 35 साल पहले हुए एक हत्याकांड में 11 पुलिसवालों को उम्रकैद के साथ 12 – 12 हज़ार रूपये का जुरमाना भी लगाया है. मथुरा जिला न्यायलय की जज साधना रानी ठाकुर ने यह फैसला सुनाया. फैसले के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री और मान सिंह की बेटी कृष्णेन्द्र दीपा कौर ने न्यायलय का आभार जताया.

राजस्थान के मामले की सुनवाई मथुरा (यूपी) में क्यों ?

मान सिंह के समर्थक राजस्थान के साथ साथ उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी थे. उस दौर में वो काफ़ी लोकप्रिय थे. राजशाही परिवार के अलावे वो सात बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य रह चुके थे. पुलिस की गोली से मौत के बाद भरतपुर के साथ कुछ और जिलों में कई दिनों तक कर्फूय लगाना पड़ा. राजा मान सिंह हत्याकांड के बाद भरतपुर की सड़के लोगों के हुजूम से भर गई. जबरदस्त हिंसा और आगजनी हुई. हिंसा रोकने के लिए पुलिस को गोली चलनी पड़ी जिसमे कई लोग मरे गए. राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में (राजस्थान सीमा से सटे) विरोध प्रदर्शन हुए. राजस्थान के हालत इतने बिगड़ गए की मामले की सुनवाई के लिए केस को मथुरा ट्रांसफर कर दिया गया.

राजा मान सिंह के हत्या की कहानी
राजा मान सिंह के हत्या की कहानी

क्या था पूरा मामला ?
मान सिंह हत्याकांड के बाद राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री माथुर को इस्तीफा देना पड़ा. लोगों का आरोप था की मुख्यमंत्री के इशारे पर पुलिस ने मान सिंह के साथ तीन और लोगों की गोली मरकर हत्या की थी. केंद्र में राजीव गाँधी की सरकार थी, उन्होंने लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए माथुर का इस्तीफा लिया तब जाकर लोगों का विरोध प्रदर्शन शांत हुआ. दरअसल 21 फरवरी ,1985 को भरतपुर के डीग में चुनाव में हुए एक विवाद के बाद पुलिस ने मान सिंह को गोली मर दिया. उस समय मान से रियासत के सदस्य भी थे. मान सिंह पर आरोप था की उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने इलाके में चुनाव प्रचार रोकने की कोशिश की. उन्होंने चुनाव प्रचार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की हेलीकाप्टर में अपने जीप से टक्कर मारी. हालाँकि तब मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर में नहीं थे. उसके बाद मान सिंह भाषण के लिए बनाए गए मंच को जीप से टक्कर मरकर गिरा दिया था.
facebook / jat kshatriya culture
facebook / jat kshatriya culture

सीएम और मान सिंह के बीच विवाद की वजह ?
मान सिंह तब निर्दलीय चुनाव मैदान में थे. उनके विधानसभा क्षेत्र डीग में कांग्रेस समर्थकों ने लक्खा टॉप के पास उनका झंडा उतरकर कांग्रेस का झंडा लगा दिया. दरअसल मान सिंह का निर्दलीय चुनाव लड़ना कांग्रेस को पसंद नहीं आया. अपने झंडे के अपमान के बाद मान सिंह ने ऐलान किया की वो यहाँ सीएम को चुनाव प्रचार नहीं करने देंगे. पहले से ही दोनों के समर्थकों में काफी कटुता थी. झंडे के अपमान से नाराज मान सिंह अपने कार्यकर्ताओं के साथ रैली स्थल पर पहुंचे और अपने जीप से मंच गिराने के बाद मुख्यमंत्री के हेलीकाप्टर में टक्कर मार दी. हालाँकि इस घटना में कोई चोटिल नहीं हुआ, लेकिन बिना रैली किये मुख्यमंत्री को सड़क के रस्ते जयपुर लौटना पड़ा. आरोप है की मुख्यमंत्री ने इस अपमान का बदला लेने के लिए पुलिस को निर्देश दिया की मान सिंह की कहानी ख़त्म करें. मानसिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ.
Rajkumari Krishnendra Kaur (FB_ Jat Kshatriya Culture)
Rajkumari Krishnendra Kaur (FB_ Jat Kshatriya Culture)

पुलिस ने कैसे दिया हत्याकांड को अंजाम ?
20 फरवरी 1985 को मुख्यमंत्री का मंच गिराने की घटना के ठीक एक दिन बाद 21 फरवरी को मान सिंह की हत्या कर दी गई. उस दिन मान सिंह अपने जीप में सवार होकर डीग के अनाज मंडी पहुंचे जहाँ पुलिस उनको घेरकर गोलियां चलाई. इस गोलीकांड में मान सिंह के अलावे उनके दो सहयोगी मरे गए लेकिन उनके दामाद विजय सिंह किसी तरह बच निकले. विजय सिंह ने वहां से भागकर जान बचाई और महल आकर बताया की पुलिस अधिकारी कान सिंह भाटी की अगुवाई में पुलिस ने पहले प्लान बनाकर मान सिंह की हत्या कर दी. पुलिस ने दलील दी की उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई लेकिन विजय सिंह ने साफ़ इंकार करते हुए कहाँ की जब हमारे पास कोई हथियार नहीं था तो कैसी आत्मरक्षा. तब के स्थानीय पत्रकार भी घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया की पुलिस ने बहुत सोच समझकर यह प्लान बनाया था.

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क्या हुआ इस हत्याकांड का नतीजा ?
मान सिंह हत्याकांड के बाद मामला राजस्थान पुलिस के हाथ से निकल गया. चुकी उनकी मौत पुलिस की गोली से हुई थी इसलिए लोगों का आक्रोश सरकार और प्रशाशन पर ज्यादा था. कई हफ़्तों तक भरतपुर की सीमा सील करना पड़ा. उनकी शवयात्रा में उमड़ा हुजूम दिल्ली में बैठे राजीव गाँधी को यह सन्देश दे गया की राजस्थान कांग्रेस के हाथ से निकल गया. लिहाजा उन्होंने स्थिति सँभालने के लिए माथुर का इस्तीफा लिया. 22 फरवरी की आधी रात को माथुर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनके बाद कांग्रेस नेता हीरालाल देवपुरा को मुख्यमंत्री बनाया गया. बावजूद इसके विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बड़ा नुकसान हुआ. इस मामले में सीबीआई से लेकर न्यायिक जाँच आयोग तक बनाया गया जिसे बीच में भंग कर दिया गया. 35 साल लगे इस मामले को अपने अंजाम तक पहुंचने में.

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