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तथ्य बिना सत्य नहीं

राहुल गाँधी के झूढ : देश और विदेश में सीना ठोककर कितने झूठ बोले है ?

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राहुल गाँधी के झूढ

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राहुल गाँधी के झूढ : देश और विदेश में सीना ठोककर कितने झूठ बोले है ?

राहुल गाँधी के झूठ सुनकर खुद झूठ भी शर्मा जाता है. कहते है एक झूठ पूरी ताक़त से कई बार बोला जाए तो लोग उसे सच मानने लगते है. सच को पराजित नहीं किया जा सकता इसलिए इतना परेशान करो की झूठ खुद सच बन जाये, राहुल गाँधी पिछले कई सालों से शायद इसी फार्मूले पर काम कर रहे है. राफेल से लेकर कृषि कानून तक उन्होंने एक झूठ को कई बार दोहराया, वो अपने स्टाइल में झूठ को इस तरह से बोलते है की सामने खड़ा व्यक्ति सच मान लेता है. एक राजनेता के रूप में राहुल ने अब जितने झूठे बयान दिए है वह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. उनके द्वारा बोले गए झूठ पर पूरी किताब लिखी जा सकती है. उन्होंने अब तक कितने झूठ बोले है इसका कोई लिस्ट तो नहीं है लेकिन कुछ बड़े झूठ के बारे में चर्चा करेंगे. उनके झूठ से बड़ा सवाल ये है की आखिर वो इतना झूठ बोलते क्यों है ?

राहुल गाँधी के झूढ
राहुल गाँधी के झूढ

राहुल गाँधी के द्वारा फैलाये गए झूठ में राफेल (Rafael), कृषि कानून (Agricultural Law) हो या फिर चीन हर बार बैकफायर कर जाता है. उनके ताज़ा झूठ की सच्चाई जानने से पहले ये जान लें की राहुल गाँधी की उम्र 50 साल है. 50 साल का व्यक्ति कतई नासमझ नहीं हो सकता इसलिए वो जो भी बोलते है सोंच समझकर बोलते है. दरअसल राहुल गाँधी जानते है की मीडिया और पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग उनके साथ है. इसलिए उनकी द्वारा बोले गए झूठ की खबर जरूर बनेगी लेकिन कोई सच्चाई नहीं बताएगा. राहुल का ‘आरोप’ या ‘दावा’ लिखकर सामान्य खबर बना दिया जाएगा, इसलिए वो देश हो या विदेश कहीं भी झूठ बोल सकते है. राहुल के बचाव के लिए सिर्फ कांग्रेसी नहीं बल्कि बल्कि पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग हमेशा तैयार रहता है.राहुल के झूठ की खासियत ये है की वो अपने बात पर अडिग रहते है, फिर चाहे सुप्रीम कोर्ट को क्यों ना कहना पड़े की तथ्यों के साथ बात करें.

अभी हाल ही में उन्होंने केरल में बंटवारे वाला बयान देते हुए कहा की उत्तर भारत से ज्यादा दक्षिण भारत का वोटर जागरूक है. दरअसल उत्तर भारत में कई राज्यों से कांग्रेस का सफाया हो गया है. खुद राहुल गाँधी अमेठी से चुनाव हर चुके है इसलिए उनकी कोशिश अब दक्षिण भारत में कांग्रेस को ज़िंदा करने की है. यही कारन है की केरल में लेफ्ट की सरकार पर हमला बोलते है और बंगाल में लेफ्ट को गले लगा लेते है. इससे पहले वो पुड्डुचेरी में मछुआरों के लिए मंत्रालय बनाने का वादा कर चुके थे, लेकिन तमाम सबूत के बावजूद केरल में भी उसी झूठ को दोहराया. सबसे बड़ा तथ्य ये है की वो खुद मत्स्य मंत्रालय से संसद में सवाल पूछ चुके है. मई 2019 में मत्स्य मंत्रालय का गठन हो चूका है जिसका जिक्र केंद्रीय मंत्री के रूप में गिरिराज सिंह समेत वित्त मंत्री ने इस साल भी बजट में भी किया गया था.केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)’ बनाई है, जिसके तहत 20,500 करोड़ रुपए का अलग बजट दिया गया जबकि, आज़ादी से लेकर 2014 तक इस विभाग के लिए सिर्फ 3682 करोड़ रूपये खर्च हुए थे.

rahul gandhi lies
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राहुल गाँधी के राजनीतिक पैटर्न को देखे तो लगता है की झूठ बोलना उनकी सोची समझी रणनीति है. ऐसा लगता है की वो झूठ के सहारे अपने लक्ष्य की प्राप्ति करना चाहते है. ऐसा नहीं है की सिर्फ राहुल गाँधी झूठ बोलते है बल्कि कांग्रेसी नेता भी राहुल गाँधी से झूठ बोलते है. पुड्डुचेरी दौरे पर गए राहुल गाँधी से तो वहां के मुख्यमंत्री ने सार्वजानिक सभा में झूठ बोला जिसे राहुल सच मान बैठे. हल ही में भारत चीन विवाद पर डिसइंगेज्मेंट प्रोसेस के ऐलान के बाद राहुल गाँधी ने इसकी आलोचना करते हुए कहा की भारत सरकार ने घुटने तक दिए. राहुल से ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है की पूर्व रक्षामंत्री अंटोनी को उनकी बात को सच साबित करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करना पड़ा. हालाँकि अंटोनी के दांव को भी सेटेलाइट इमेज ने उल्टा कर दिया. राहुल गाँधी की झूठ की पराकाष्ठा इतनी बढ़ गई है की वो भूल जाते है की मोदी का विरोध करते करते वो देश का विरोध कर जाते है. दरअसल राहुल के बारे में कहा जाता है की वो पैदा ही प्रधानमंत्री बनने के लिए हुए है. शायद यही सोंच उनको येन केन प्रकारेण कुर्सी दिलाने के लिए झूठ बोलने पर मज़बूर करता है. खास बात ये है की झूठ सिर्फ रैली या प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं बल्कि विदेशों में भी बोलते है.

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राहुल गाँधी के झूढ : याद करिये तो अमेरिका के बर्कले यूनिवर्सिटी में छात्रों के सामने कहा था की हमारा पूरा देश वंशवाद से चलता है. खुद को सही साबित करने के लिए उन्होंने कई उदहारण भी गिनवाए. वहां पर राहुल ने भारत की छवि को ख़राब करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। स्टेचू ऑफ़ यूनिटी (सरदार पटेल की मूर्ति) के बारे में गुजरात में पाटीदारों से कहाँ की यह मूर्ति मेड इन चीन है, यहाँ भी उन्होंने पाटीदारों का वोट लेने के लिए झूठ का सहारा लिया. अमेरिका में बैठकर वो मोदी की आलोचना करते हुए बोले की सरकार जम्मू कश्मीर में आतंक से निपटने में नाकाम रही, जबकि सबसे ज्यादा आतंकी मोदी सरकार के कार्यकाल में ही मरे गए है. उह्नोने वहां यह नहीं बताया की आर्टिकल 370 उनकी सरकार ने लागु किया और मोदी सरकार ने हटाया. विदेश में बुसेरियस समर स्कूल ऑन ग्लोबल गवर्नेंस (वहां के छात्र रह चुके है राहुल) SC ST एक्ट को मोदी सरकार ने कमजोर कर दिया. जबकि कानून में बदलाव सुप्रीम कोर्ट ने किया था और संसद में कानून को मोदी सरकार ने मज़बूत बनाया था.

बुसेरियस समर स्कूल स्कूल में उन्होंने कहा की चीन एक दिन में 50 हज़ार नई नौकरियां पैदा करता है, जबकि भारत सिर्फ 450 लोगों को नौकरी देता है. जबकि सिर्फ 2016 2017 में 4 .16 लाख यानि एक दिन में 1100 नौकड़ी मिली. इसके अलावा लंदन में एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में कहा की भारत के सिख दंगे में कांग्रेस पार्टी शामिल नहीं थी. जबकि 2014 चुनाव के समय अंग्रेजी चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था की सिख दंगे में उनके पार्टी के कुछ लोग शामिल थे. लंदन के एक कॉलेज में बोलते हुए उन्होंने कहा की उनके पास डोकलाम की कोई जानकारी नहीं है. दरअसल उनसे पूछा गया था की वो प्रधानमंत्री होते तो चीन से कैसे निपटते. जून 2017 में डोकलाम (भूटान का क्षेत्र) विवाद हुआ था और 28 अगस्त, 2017 को आपसी सहमति के बाद दोनों सेनाए पीछे हटी थी. आपको बता दें की डोकलाम पर बनी संसदीय कमिटी के सदस्य थे. उनके अलावा शशि थरूर भी उस कमिटी में शामिल है. ऐसे में राहुल ने वहां झूठ क्यों बोला ये समझ से पड़े है. एक राजनेता के तौर पर सरकार या किसी पार्टी पर आरोप प्रत्यारोप करने की आज़ादी हर नेता को है. लेकिन राहुल गाँधी सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि देश के सबसे पुराणी पार्टी के अध्यक्ष और भावी प्रधानमंत्री कैंडिडेट है.
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