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तथ्य बिना सत्य नहीं

रिगा चीनी मिल बंद : बिहार में डबल इंजन सरकार का कमाल ?

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रिगा चीनी मिल बंद

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रिगा चीनी मिल बंद : बिहार में डबल इंजन सरकार का कमाल ?

चुनाव ख़त्म हो गए और रिगा चीन मिल बंद होने का ऐलान कर दिया गया है. बिहार विधान सभा चुनाव के समय सत्ता और विपक्ष दोनों ने बड़े बड़े वादे किये. बेरोजगारी की वजह से पलायन के मामले में बिहार पहले स्थान पर है. 30 साल पहले तक जो बिहार दूसरे प्रदेश के लोगों को रोजगार देता था आज पलायन उसकी नियति बन गई है. बिहार के कुछ जिलों में अभी भी चीनी मिल चल रहे है जिससे हज़ारों घरों का चूल्हा जलता है. इस बिच सत्ता आई और गई, सीएम का चेहरा कई बार बदला लेकिन बिहार की किस्मत नहीं. लालू यादव के शासनकाल में बंद हुए उद्योग नितीश कुमार की सरकार में भी नहीं खुल सके. 2020 विधानसभा चुनाव में विधायक से लेकर पीएम तक सबने उद्योग चालू करने के वायदे किये. चालू होना तो दूर एक और चीनी मिल बंद होने वाला है.

रिगा चीनी मिल बंद
रिगा चीनी मिल बंद

बिहार में रोजगार, मजाक समझे है क्या ?

बिहार में अभी कुल 12 चीनी मिल चालू है. इनमे से एक सीतामढ़ी का रिगा चीनी मिल है जिसकी हालत ख़राब है. अब मिल प्रबंधन ने इसे बंद करने का निर्णय लिया हैं। प्रबंधन का कहना है की वो बिना सरकारी मदद के मिल चलना अब संभव नहीं है. प्रबंधन के इस घोषणा के बाद उसके कर्मचारियों का भविष्य खतरे में है. इस मिल के बदौलत जिन किसानों और मज़दूरों का घर चलता है उनमे घोर निराशा है. इस मिल में अभी तकरीबन 600 लोग काम करते हैं. किसान गन्ने की खेती कर खुशहाल रहते थे, उन्हें इससे नकद पैसे मिलते थे, जिससे परिवार चलाना आसान होता था। चीनी मिल से अन्य रोजगार भी मिल जाता था। लेकिन चीनी मिलें बंद होने से खेती और किसानी दोनों की कमर टूट गई है. पिछले 30 सालों में चंपारण, मुजफ्फरपुर, सारण से लेकर बिहार के अनेक क्षेत्रों में कई चीनी मिल और फैक्टरियां बंद हुई है. इंडिया का सबसे फेमस चॉकलेट ‘मॉर्टन’ छपरा के मढ़ौरा में बनता था. इस ब्रांड का चॉकलेट सबसे ज्यादा विदेशों में जाता था.

riga chini mill
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रिगा चीनी मिल के के लिए जिन किसानों ने गन्ने की खेती की है उनकी हालत सबसे ज्यादा ख़राब है. खेतों में लगभग 100 करोड़ की फसल खड़ी है. इन किसानो का लगभग 80 करोड़ रूपये अभी बकाया है जिसका भुगतान चीनी मिल को करना है. कोरोना जैसे कठिन हालत में अगर चीनी मिल बंद हुआ तो किसान से लेकर कर्मचारी और मज़दूरों में हाहाकार मच जाएगा.पिछले पांच साल से चीनी मिल आर्थिक बदहाली का सामना कर रहा है. इसी कारण चीनी मिल के ऊपर किसानों का तकरीबन 80 करोड़ रुपया लंबे अरसे से बकाया है. रीगा चीनी मिल से जुड़े तकरीबन 50 हजार किसान भी परेशान हैं. नए सत्र में चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू होगा या नहीं, किसानों मे इस बात को लेकर संशय की स्थिति है. किसानों के नकदी फसल का एकमात्र सहारा यही मिल है. अगर समय रहते सरकार ने सही कदम नहीं उठाया तो बिहार में सिर्फ 11 चीनी मिल रह जाएंगे. बंद होने के बाद हज़ारों लोगों को पलायन करना पड़ेगा. प्रबंधन का दावा है की मालिक ने मिल को चलने के लिए निजी सम्पति तक बेच डाली है.
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