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तथ्य बिना सत्य नहीं

शबनम और सलीम प्रेमकहानी : फांसी चढ़ने वाली पहली महिला होगी !

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शबनम और सलीम प्रमकहानी

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शबनम और सलीम प्रेमकहानी : फांसी चढ़ने वाली पहली महिला होगी !

शबनम और सलीम प्रेमकहानी उनलोगो के लिए मिशाल है जो प्यार में अंधे हो जाते है. भारत का यह पहला आपराधिक मामला है, जिसमे किसी महिला को फांसी की सजा हुई है. शबनम और सलीम दोनों को उनके अंधे प्यार ने फांसी के फंदे तक पंहुचा दिया. यह एक ऐसी घटना थी जिसने पुरे देश को झकझोड़ दिया था. आखिर ऐसा क्या किया था इन दोनों प्रेमी जोड़े ने जिसकी वजह से उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई ? शबनम को उसके प्रेमी के साथ कब फांसी पर चढ़ाया जाएगा ? जानिए शबनम सलीम के प्रेम कहानी और वीभत्स हत्याकांड का पूरा सच.

शबनम और सलीम प्रमकहानी
शबनम और सलीम प्रमकहानी

आज़ाद भारत में आज तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है. उत्तर प्रदेश के अमरोहा की रहने वाली इतिहास की पहली महिल बनेगी जिसके गले में फंदा डाला जाएगा. शबनम फ़िलहाल मथुरा जेल में बंद है. मथुरा जेल में 150 साल पहले फांसी घर बनाया गया था लेकिन आज़ादी के बाद आज तक यहाँ किसी को फांसी पर नहीं चढ़ाया गया है. जेल प्रशासन ने शबनम को फांसी चढाने की पूरी तयारी कर ली है. जेल प्रशाशन को शबनम और सलीम के डेथ वारंट (फांसी का हुक्म) का इंतज़ार है. फांसी के लिए रस्सी बनाने का आर्डर दे दिया गया है. हालाँकि फांसी की तारीख अभी तय नहीं हुई है. राष्ट्रपति के पास से दया याचिका ख़ारिज होने के बाद दोनों ने पुनर्विचार याचिका डाली है. जिसकी मंज़ूरी की उम्मीद ना के बराबर है.

फांसी पर चढ़ने वाली शबनम बरैली जेल में क़ैद है जबकि उसका आशिक़ सलीम आगरा जेल में में बंद है. उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले में कोई भी माँ बाप अपने बच्ची का नाम शबनम नहीं रखता. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की आज शबनम के प्रति लोगों की क्या सोंच है.अमरोहा के बावनखेड़ी गांव की रहने वाली है शबनम. इस पुरे इलाके में खौफ का दूसरा नाम शबनम है. यह मामला 2008 का है जब अमरोहा में एक वीभत्स हत्याकांड हुआ. यहाँ एक ही परिवार के 7 लोगों की रात में हुई हत्या ने पुरे देश को हिला दिया था. शबनम एक पढ़ी लिखी महिला है. आर्थिक रूप से संपन्न घर की शबनम ने MA तक की पढाई की है. वह गांव के एक स्कूल में टीचर रह चुकी है.

Shabnam

15 अप्रैल 2008 को शबनम के परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी गई. मरने वालों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 80 साल तक के बुजुर्ग शामिल थे. इस भीषण हत्याकांड में शबनम इकलौती सदस्य थी जिसे एक खरोंच तक नहीं आई. शबनम की उम्र तब 25 साल थी जिसके पेट में एक बच्चा पल रहा था. घटना की सुचना मिलते ही आस पास के गांव में हड़कंप मच गया. शबनम ने पुलिस को बताया की कुछ लुटेरे उसके घर में घुस आये थे और परिवार के लोगों की हत्या कर दी. उस समय वह बाथरूम में जाकर छिप गई जिसकी वजह से उसकी जान बच गई. हत्याकांड इतना बड़ा था की उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती भी शबनम को सांत्वना देने जाना पड़ा.

इस हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश पुलिस की नींद उड़ा राखी थी, सबसे बड़ी मुश्किल यह थी की लुटेरों का कोई सुराग तक नहीं मिला. पुलिस इस बात से हैरान थी की लुटेरों ने कुछ भी लुटा नहीं, घर का सामन भी अपनी जगह पर सही सलामत था. पुलिस को शबनम पर शक हुआ तब उसने कॉल डिटेल्स निकलवाई. शबनम के कॉल डिटेल्स में सलीम नाम के शख्स का पता चला. हत्या के रात भी सलीम के नंबर पर देर तक बात हुई थी. इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ की मरने वालों को पहले जहर दिया गया था. पुलिस ने जब सख्ती से शबनम से पूछताछ किया तो उनके रोंगटे खड़े हो गए. पुलिस के सख्ती के आगे शबनम टूट गई और उसने कबूल किया की सलीम के साथ मिलकर उसने ही हत्याकांड को अंजाम दिया था.

पुलिस के पूछताछ में शबनम ने कबूल किया वो सलीम से प्यार करती थी. सलीम 10 वीं पास था जबकि शबनम MA डिग्री धारक थी. इसके अलावा सलीम की पारिवारिक हैसियत भी शबनम के मुक़ाबले कमज़ोर थी. सबसे बड़ी बढ़ा दोनों की जाती थी, मुस्लिम होने के बावजूद दोनों अलग अलग समुदाय से थे. आर्थिक और सामाजिक असामनता ने दोनों के रिश्तों का क़त्ल कर दिया. शबनम की शादी कही और हो गई बावजूद सलीम से वो सलीम से प्यार करती रही. घरवाले उसके प्यार के बीच में आ रहे थे इसलिए उसने सलीम के साथ प्लान बनाकर सबको मौत के घाट उतार दिया. जहर देने के बाद दोनों ने पुरे सदस्य को कुलहरि से काट डाला.

शबनम को सज़ा मिलेगी या नहीं, ये कुछ ही दिनों में साफ हो जाएगा. उसने जेल में राहत हुए एक बेटे को जन्म दिया था. उसका बेटा एक पत्रकार के पास है. इस्लाम गोद लेने की इजाज़त नहीं देता इसलीए ये पत्रकार शबनम के बेटे को गोद नहीं ले सकता. शबनम जेल से ही अपने को खत लिखा करती है.

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