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तथ्य बिना सत्य नहीं

स्वरा भास्कर का फैक्टचेक : अडानी अम्बानी की एजेंट किसानो को धोखा दे रही है ?

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स्वरा भास्कर का फैक्टचेक

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स्वरा भास्कर का फैक्टचेक : अडानी अम्बानी की एजेंट किसानो को धोखा दे रही है ?

किसान आंदोलन में शामिल हुई स्वरा को लोग एजेंट बता रहे है, द फैक्टशाला ने स्वरा भास्कर का फैक्टचेक किया है. हमारे इस पड़ताल में कई चौकाने वाली बातें सामने आई है. स्वरा भास्कर देश की उन चुनिंदा फ़िल्मी सितारों में शामिल है जो हर बात पर मोदी सरकार का विरोध करते रहती है. नया मामला किसान आंदोलन से जुड़ा है. मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसान धरने पर बैठे है. इस आंदोलन को भी समर्थन देने के लिए स्वरा मुंबई से दिल्ली पहुंच गई. इससे पहले Anti CAA प्रोटेस्ट में उनका एक भड़काऊ वीडियो वायरल हुआ था. पिछले साल दिल्ली में हुए दंगे के बाद स्वरा भास्कर को अरेस्ट की मांग की जा रही थी. नया विवाद तब शुरू हुआ जब ( आरोप है) स्वरा भास्कर ने मंच से मोदी सरकार को अडानी अम्बानी का गुलाम बताया. इसके बाद से स्वरा भास्कर को अडानी अम्बानी का एजेंट बताया जा रहा है. क्या है इस खबर की सच्चाई ?

स्वरा भास्कर का फैक्टचेक
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स्वरा भास्कर इससे पहले दिसंबर में भी किसान आंदोलन में शामिल हुई थी. लेकिन तब उनको मंच नहीं दिया गया था. दूसरी बार पंजाबी गायको और मोदी विरोधी फ़िल्मी सितारों का जमावड़ा लगा जनवरी में. आंदोलन स्थल पर गायकों ने किसान आंदोलन के समर्थन में गाना गया तो बाकि सितारों ने मंच से भाषण दिया. जब स्वरा भास्कर मंच पर भाषण देने पहुंची तो उन्होंने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को अडानी और अम्बानी का गुलाम बताया. स्वरा के इस भाषण के बाद वो खुद सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गई. सोशल मीडिया पर उन्हें अडानी अम्बानी का एजेंट बताया जा रहा है. आरोप लग रहे है की अडानी अम्बानी के कहने पर वो किसान आंदोलन में शामिल हुई थी. स्वरा भास्कर को एजेंट क्यों बताया जा रहा है. दरअसल स्वरा भास्कर मोदी को कोसने का कोई मौका नहीं छोड़ती इसलिए कई बार अति उत्साह में वो गलती कर बैठती है.

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स्वरा को अडानी अम्बानी का एजेंट बताने के पीछे उनके दो विज्ञापन है जो उन्होंने दोनों कंपनियों के लिए किये थे. स्वरा ने 2017 में अडानी ग्रुप के फार्च्यून आयल का विज्ञापन किया था. अडानी ग्रुप के प्रोडक्ट कच्ची घनी सरसो तेल का विज्ञापन कई महीनो तक टीवी पर और अख़बारों में छापता रहा. इसके अलावा उन्होंने रिलायंस (अम्बानी) कंपनी के लिए भी काम किया है. 2018 में स्वरा ने रिलायंस हेल्थ इंश्योरेंस का विज्ञापन किया था. जाहिर सी बात है दोनों विज्ञापनों के लिए उनको जितना पैसा मिला होगा उससे कहीं ज्यादा दोनों कंपनियों ने मुनाफा कमाया होगा. गौरतलब है की किसानो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अडानी और अम्बानी का विरोध किया है. पंजाब में तो रिलायंस के टावर और सुपर मार्केट को निशाना बनाया गया. इसलिए सवाल उठ रहा है की किसान जिसका विरोध कर रहे है उसको फायदा पहुंचने वाली को मंच क्यों दिया गया ?
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