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SC/ST एक्ट का दुरुपयोग : ब्राम्हण होने की सजा 20 साल, योगी के खिलाफ भी मामला दर्ज !

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SC/ST एक्ट का दुरुपयोग

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SC/ST एक्ट का दुरुपयोग : सवर्ण होने की सजा 20 साल, योगी के खिलाफ भी मामला दर्ज !

देश में SC/ST एक्ट का दुरुपयोग ब्लैकमेलिंग से लेकर निजी खुन्नस निकालने के लिए हो रहा है. किसी भी देश का कानून अपने नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए बनाया जाता है. लेकिन भारत शायद इकलौता देश है जहाँ बेगुनाहों को भी वर्षों तक जेल में रखा जाता है. दहेज़ कानून से लेकर हरिजन एक्ट तक में कई ऐसे मामले सामने आ चुके है. उत्तर प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है जो किसी दलित या मुस्लिम का होता तो अब तक मीडिया ने बवाल काट दिया होता. क्या है ये मामला इससे पहले जान लीजिये की यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी SC ST एक्ट का शिकार हो गए है. योगी समेत एक जिले के तमाम अधिकारीयों के खिलाफ हरिजन एक्ट में मामला दर्ज किया गया है.

SC/ST एक्ट का दुरुपयोग
SC/ST एक्ट का दुरुपयोग

दहेज़ कानून के बाद हरिजन एक्ट एक ऐसा कानून है जिसका सबसे ज्यादा गलत इस्तेमाल होता है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की सच्चाई काफी दर्दनाक है. फर्ज कीजिये आपको या आपके परिवार के किसी भी सदस्य को बिना किसी गुनाह के 20 साल तक जेल में रहना पड़े ? माननीय न्यायलय ने एक व्यक्ति को बाइज्जत बरी किया है जो पिछले 20 सालो से SC/ST एक्ट के तहत बलात्कार के आरोप में जेल में बंद था. ये मामला सिर्फ एक उदहारण है, ऐसे कई लोग आज भी सलाखों के पीछे है जिनके खिलाफ SC/ ST का दुरुपयोग हुआ होगा. माननीय जज डॉ कौशल जयेंद्र ठाकर और गौतम चौधरी की पीठ ने झूठे बलात्कार और दलित अत्याचार मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए एक व्यक्ति को बरी कर दिया.

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था की दलित एक्ट का दुरूपयोग बढ़ा है, इसलिए इस मामले में तत्काल गिरफ़्तारी पर रोक लगा दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश भर में बवाल हुआ जिसके बाद मोदी सरकार ने कोर्ट का फैसला बदलते हुए कानून को ज्यों का त्यों बना दिया. आज मोदी सरकार का कानून ही उनके मुख्यमंत्री को भारी पड़ा है. उन्नाव रेप केस में फर्जी खबर फ़ैलाने के आरोप में 8 ट्वीटर अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इनमे भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर के चैनल का नाम भी शामिल है. पुलिस की कार्यवाई के जवाब में भीम सेना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उन्नाव के पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी सिटी और पुलिस स्टेशन कोतवाली सदर प्रभारी पर गुरुग्राम में एससी/एसटी एक्ट के तहत जवाबी शिकायत दर्ज करवाई है।

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यह घटना सिलावन गांव (ललितपुर) साल 2000 की है, आरोपी विष्णु (पुत्र रामेश्वर तिवारी ) धारा 376 506 और SC ST एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था. अब जाकर कोर्ट ने तथ्यों और मेडिकल रिपोर्टों के आधार पर मामले को खारिज कर दिया. अदालत ने यह पाया की आरोपी को आपसी रंजिश का शिकार बनाया गया. दरअसल पीड़ित और आरोपी के बीच जमीन का विवाद था लेकिन पीड़ित पक्ष ने आरोपी से बदला लेने के लिए बलात्कार और हरिजन एक्ट में मामला दर्ज करवाया था. निचली अदालत ने गलत तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया था जिसे उच्च न्यायलय ने बदल दिया. आपको मालूम होना चाहिए की सरकार ने खुद माना था की सिर्फ 2016 में 8900 केस गलत थे जिन्हे आरोपी को फंसने के लिए दायर किया गया था. यानी देखा जाए तो इस कानून का जितना उपयोग होता है, उससे अधिक दुरुपयोग होता है।
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